ठीक नहीं है भारत में सार्वजनिक बैंकों की हालत: मूडीज

  • ठीक नहीं है भारत में सार्वजनिक बैंकों की हालत: मूडीज
You Are HereBusiness
Saturday, February 22, 2014-11:46 AM

नई दिल्ली: वैश्विक साख निर्धारक संस्था मूडीज ने कहा है कि भारत में सरकार की ओर से 11200 करोड़ के पूंजी आवंटन के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हालत अच्छी नहीं है क्योंकि यह रकम उनके 25 से 36 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता से काफी कम है। मूडीज के अनुसार मौजूदा स्थिति में इन बैंकों को पूंजी बाजार से ऐसे समय धन जुटाना पड़ेगा जबकि इनमें सुस्ती का माहौल है। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बैंकों से पूजी तरलता अनुपात बनाए रखने के लिए बाजार का रुख करने की हिदायत दी है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है क्योंकि बाजार में फिलहाल निवेश माहौल सुस्त बना हुआ है।

मूडीज के अनुसार हालांकि देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने जनवरी में पूंजी बाजार से शेयर बेचकर रकम जुटाई लेकिन यह रकम निर्धारित लक्ष्य से कम रही। अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयर भी बाजार में काफी कीमतों पर कारोबार कर रहे हैं। मूडीज ने इसके लिए सरकार द्वारा बंैकिंग क्षेत्र के लिए बजट में की गई व्यवस्था को दोषी ठहराया है। उसके अनुसार सरकार ने बजट में बैंकों के लिए जो धन आवंटित किया है वह इन बैकों में पिछले तीन वित्त वर्ष में झोंकी गई कुल पूंजी से भी कम है।

रेटिंग एजेंसी के अनुसार बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां जिस रफ्तार से बढ़ रही है उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि वित्त वर्ष 2015 में इन्हें बाहर से बड़ी पूंजी की दरकार होगी। मूडीज के अनुसार वर्ष 2013 में सरकारी बैंकों का औसत एनपीए 3.4 प्रतिशत से बढकर 4.3 प्रतिशत हो चुका है। वित्त वर्ष 2015 में इसमें और बढोतरी होने की आंशका है।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You