अब सुब्रत राय को कौन देगा ‘सहारा’

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Friday, February 28, 2014-9:14 PM

नई दिल्ली:  सहारा इण्डिया समूह के प्रमुख सुब्रत राय सहारा को अब कौन ‘सहारा’ देगा यह आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। सुब्रत राय को आज मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस हिरासत में भेजते हुए उन्हें 4 मार्च को दो बजे तक उच्चतम न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया। राजनीति, क्रिकेट से लेकर सभी जगह यह चर्चा में है रेलवे के बाद सबसे ज्यादा लोगों को नौकरी देने वाले सहारा ग्रुप के मुखिया सुब्रत राय को कौन ‘सहारा’ देगा।

कौन है सुब्रत राय सहारा
सुब्रत राय जैसे दिग्गज कारोबारी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। सुब्रत का जन्म 10 जून 1948 को हुआ। उनके पिता का नाम सुधीर चंद्र रॉय और माता का नाम छवि रॉय था। सुब्रत ने  शुरुआती शिक्षा-दीक्षा कोलकाता में ली जिसके बाद उन्होंने गोरखपुर के एक सरकारी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। सुब्रत रॉय ने अपना पहला कारोबार गोरखपुर से ही शुरू किया। एक छोटे से शहर से बिजनेस शुरू करने वाले इस शख्स ने 36 सालों में दुनिया भर में अपना कारोबार फैला लिया। सत्तर के दशक में यूपी के गोरखपुर शहर में स्कूटर से चलने वाला सुब्रत राय चिटफंड के कारोबार का मामूली आदमी हुआ करते थे। स्कूटर से घूम-घूम कर यह चिटफंड को मार्केट करता था, सेल करता था, और लोगों से पैसे लगवाने को तत्पर रहता था।

सुब्रत राय गिरफ्तार
उच्चतम न्यायालय के गैरजमानती वारंट जारी करने के बाद सहारा इंडिया प्रमुख सुब्रत राय ने आज पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। निवेशकों के 20 हजार करोड़ रुपये नहीं लौटाने के एक मामले में उच्चतम न्यायालय ने गत बुधवार को राय के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था। राय के खिलाफ वारंट की तामील कराने के लिए कल गोमतीनगर पुलिस का एक दल सहारा शहर गया था लेकिन सहारा प्रमुख वहां नहीं मिले थे।

सुब्रत राय ने कल विभिन्न अखबारों में दिए गए विज्ञापन में अपना पक्ष रखने की कोशिश करते हुए कहा था कि वह निवेशकों को 20 हजार करोड़ रुपये लौटाने के मामले में अदालत में 26 फरवरी को पेश होने के लिए निकल चुके थे लेकिन 24 फरवरी की शाम को उनकी 92 वर्षीय मां की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें दिल्ली से वापस लखनऊ लौटना पड़ा था।


क्या है मामला
लाखों निवेशकों के पैसे कथित रुप से हड़पने के एक मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और सहारा समूह के बीच लंबे समय से न्यायालय में मामला चल रहा है। समूह की दो कंपनियों (सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा इंडिया हाऊसिंग इन्वेस्टमेंट लिमिटेड) पर निवेशकों से 24 हजार करोड़ रुपये अवैधरूप से जुटाने का आरोप है।


प्रमुख तिथियां

सितंबर 2009: सहारा प्राइम सिटी ने विवरण पुस्तिका ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रास्पेक्टस (डीआरएचपी) सौंपा।

अक्तूबर 2009: सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कार्पोरेशन लिमिटेड (एसआईईसीएल) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (एचएसआईसीएल) ने रजिस्ट्रार

आफ कंपनीज को वितवरण पुस्तिका सौंपा।

दिसंबर 2009: प्रोफेशनल ग्रुप फार इन्वेस्टर प्रोटेक्शन की ओर से सहारा समूह के खिलाफ शिकायत मिली जिसमें उसने एसआईआरईसीएल और एचएसआईसीएल द्वारा

धन जुटाने में गैरकानूनी तरीके अपनाने का आरोप लगाया।

जनवरी 2010: किसी रोशन लाल की राष्ट्रीय आवास बैंक के जरिए सहारा समूह के खिलाफ इसी तरह की शिकायत मिली।

नवंबर 2010: सेबी ने दोनों कंपनियों के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित किया।

जून 2011: सेबी ने अंतिम आदेश पारित किया।

अक्तूबर 2011: प्रतिभूति अपीलीय पंचाट ने सेबी के आदेश को सही ठहराया।

अगस्त 2012: उच्चतम न्यायालय ने दोनों कंपनियों को सेबी के पास 24,000 करोड़ रपए जमा करने का   निर्देश दिया ताकि निवेशकों को धन वापस किया जा सके।

दिसंबर 2012: उच्चतम न्यायालय ने सहारा का तीन किस्तों में धन जमा करने की मंजूरी दी। उसने 5,120 करोड़ रुपये की पहली किस्त जमा की।

फरवरी 2013: दोनों कंपनियों द्वारा किस्तें जमा नहीं करने पर सेबी ने समूह के खिलाफ जब्ती आदेश पारित।

मार्च 2013: सेबी ने सुब्रत राय को गिरफ्तार करने की मांग की।

अप्रैल 2013: सम्मन जारी होने पर राय सेबी के सामने पेश हुए।

जुलाई 2013: सेबी ने सहारा समूह द्वारा न्यायालय के निर्देश का पालन नहीं करने के मामले में उच्चतम न्यायालय का रुख किया।

नवंबर 2013: सुब्रत राय के देश छोडऩे पर प्रतिबंध।

फरवरी 20, 2014: उच्चतम न्यायालय ने राय से व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के लिए कहा।

फरवरी 26, 2014: राय के व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित नहीं होने पर उच्चतम न्यायालय ने गैर-जमानती वारंट जारी किया, सहारा प्रमुख ने अदालत में पेश नहीं होने के लिए मां की बीमारी की वजह बताया।

फरवरी 28, 2014: राय को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार किया।

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