जानिए आप तक कैसे और कहां से पहुंचता है रुपया ?

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Wednesday, November 16, 2016-12:28 PM

नई दिल्लीः 8 नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की उसके बाद से देश में सिर्फ और सिर्फ नोटों की ही चर्चा हो रही है। नोट पाने के लिए लोग बैंकों और एटीएम के बाहर घंटों कतार में इंतजार कर रहे हैं। कुछ जगहों पर नोटों की कमी की वजह से मौत जैसे दुखद हादसे हुए भी हुए। बैंक नोट ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल हम रोज ही करते हैं लेकिन उस पर चर्चा शायद ही कभी की हों। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में इन नोटों की अहम भूमिका होती है लेकिन ज्यादातर लोगों को ये नहीं पता होता है कि ये नोट आते कहां से हैं। लेकिन पुराने नोटों के बंद होने और नए नोटों के जारी होने की चर्चाओं के बीच आज आपको नोटों के बारे में जानकारी देंगे कि नोट आते कहां से हैं और हम तक कैसे पहुंचते हैं।

BRBNMPL द्वारा छापे जाते हैं नोट 
हम जिन नोटों का प्रयोग करते हैं उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (बी.आर.बी.एन.एम.पी.एल.) छापता है। बी.आर.बी.एन.एम.पी.एल. भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) की एक शाखा है। बी.आर.बी.एन.एम.पी.एल. मैसूर और शालबनी स्थित दो छापेखानों में ये नोट छापता है। इसके अलावा सरकारी दस्तावेज छापने वाला भारत सरकार का सिक्योरिटी प्रिटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया भी करेंसी नोट छापता है। छापेखाने से नोट आर.बी.आई. नोट और सिक्कों को बैंक शाखाओं के माध्यम से वितरित करता है। आर.बी.आई. की इन बैंक शाखाओं को करेंसी चेस्ट (तिजोरी) कहते हैं।

कैसे पहुंचता है नोट लोगों तक 
नए नोट छापेखाने से आर.बी.आई. के दफ्तर, आर.बी.आई. के दफ्तर से करेंसी चेस्ट और फिर वहां से बैंकों की शाखाओं में पहुंचते हैं। बैंकों से यही नोट आम आदमी को मिलते हैं। आर.बी.आई. के पास 19 वितरण कार्यालय, 4,075 करेंसी चेस्ट और 3746 छोटे सिक्कों के डीपो हैं। करेंसी चेस्ट और सिक्के के डीपो का प्रबंधन वाणिज्यिक, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक करते हैं। सबसे अधिक 1965 करेंसी चेस्ट भारतीय स्टेट बैंक (एस.बी.आई.) के पास हैं।

मांग के आधार पर दिए जाते हैं बैंकों को नोट 
करेंसी को विशेष रूप से निर्मित ट्रकों में आर.बी.आई. अधिकारियों की निगरानी में पहुंचाया जाता है। करेंसी चेस्ट से बैंक की शाखाओं तक नोट ले जाने की जिम्मेदारी बैंक की होती है। करेंसी चेस्ट से मांग के आधार पर बैंकों को नोट दिए जाते हैं। बैंक कारोबार के आधार पर करेंसी चेस्ट से नोटों की मांग करते हैं।

इस तरह तय होती है नोटों की संख्या
आर.बी.आई. वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) की विकास दर, मुद्रास्फीति और अलग-अलग नोटों के वितरण अनुपात के आधार पर नोट जारी करता है। भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता द्वारा तैयार मांग का अनुमान लगाने वाले मॉडल द्वारा इस बात का अध्ययन करता है। आर.बी.आई. मांग में बढ़त, नोटों को बदले जाने की जरूरत और आवश्यक जमा राशि का अनुमान करता है।

प्रतिदिन एटीएम में डाले जाते हैं नोट 
बैंक प्रतिदिन निकासी क्षमता के आधार पर ऑटोमैटिक ट्रेलर मशीन (ए.टी.एम.) में पैसे डालते हैं। कई बैंक दूर के इलाकों में स्थित ए.टी.एम. में पैसे डालने का काम किसी बाहरी एजेंसी को सौंप देते हैं। पिछले दो साल में आर.बी.आई. के छापेखाने से मांग से कम नोट छापे गए। 


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