अमेरिका भी था हिरोशिमा की तरह तबाही की कगार पर

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Sunday, September 22, 2013-4:18 PM

लंदन:  एक समय अमेरिका जापान के हिरोशिमा की तरह परमाणु बम धमाके में तबाह होने की कगार पर पहुंच गया था। यह घटना 1961 वर्ष की है, जब अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना प्रांत में एक बम वाहक  विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण दो हाइड्रोजन बम वहां गिर गए थे। इनमें से एक बम में विस्फोट होने ही वाला था। यह हाईड्रोजन बम हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 260 गुना अधिक क्षमता वाला था । ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये दस्तावेज एक खोजी पत्रकार एरिक स्कोलोसेर ने सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए हाल ही में हासिल किए थे। इन दस्तावेजों के मुताबिक, बम वाहक विमान बी-52 बीच उड़ान उत्तरी कैरोलिना के गाल्डसबोरो के एक मैदान  में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और दो मार्क 39 हाइड्रोजन बम गलती से गिर गए थे। इनमें से एक बम में धमाका होने ही वाला था, लेकिन एक कम बोल्टेज वाले स्विच ने विस्फोट वाले भाग में करंट सप्लाई नहीं किया, जिससे यह धमाका नहीं हो पाया।

वर्ष 1969 के दस्तावेजों में इसकी पहली बार पुष्टि की गई थी कि 23 जनवरी, 1961 को अमेरिका हाइड्रोजन बम धमाके में तबाह होने की कगार पर पहुंच गया था। उस समय अमेरिका और रूस द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तनाव की स्थिति पर था। अमेरिका सरकार इस बात से सदा इन्कार करती रही है कि यह परमाणु हथियार अमेरिकी नागरिकों की जान के लिए खतरा हो सकते हैं। सरकार के वैज्ञानिक पार्कर जोंस ने इस हादसे के आठ साल बाद अपनी किताब में इसका वर्णन किया है।

जोंस के मुताबिक, कि मार्क 39 हाइड्रोजन बम से लैस बी 52 बमवर्षक विमान में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया था।  जोंस  के अनुसार वर्ष 1950 से 1968 की अवधि में अमेरिका में नाभिकीय हथियारों को लेकर 700 से अधिक हादसे हुए थे।


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