चंडीगढ़ : 61 साल पुरानी टॉय ट्रेन सुरंग में कैद, आज़ादी के लिए प्रशासन की पहल की देर

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Tuesday, November 28, 2017-5:55 PM

चंडीगढ़, (रश्मि रोहिला): चंडीगढ़ प्रशासन की अनदेखी के चलते देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू  द्वारा बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया सैक्टर-24 स्थित इंद्रा हॉलीडे होम अपनी असली पहचान खो चुका है। नेहरू का विजन था कि वह एक ऐसा होम बनाएं, जिसमें बच्चों को शिक्षा मिलने के साथ-साथ मनोरंजन भी हो सके। बता दें कि उस समय चंडीगढ़ की स्थापना नहीं हुई थी। जो वो क्षेत्र पंजाब के अंतगर्त था। उस दौरान रहे पंजाब के सी.एम. ने सात एकड़ जमीन इस होम को बनाने के लिए दे दी गई थी। इसके बाद नेहरू ने रेल मंत्रालय से बात कर बच्चों के मनोरंजन के लिए इस होम में एक टॉय ट्रेन का प्रबंध करने के लिए कहा था। फिर यहां एक किलोमीटर लेन बिछाई गई। जहां टॉय ट्रेन चलती थी, लेकिन आज इंद्रा हॉलीडे होम में सब कुछ बदल चुका है। अब यह होम एक मैडीकल सैंटर के रूप में उभर रहा है। अगर प्रशासन चाहे तो इसे दोबारा फिर शुरू कर सकता है।

सरकारी संपत्ति को किया भंग
किसी भी सरकारी संपत्ति के अंतर्गत इमारत को बिना परमिशन के हाथ लगाना गैर कानूनी है। जो इंद्रा हॉलीडे होम की बिल्डिंग के साथ हुआ है। यह कहना है यू.टी कैडर एजुकेशनल एंप्लॉय के प्रधान स्वर्ण सिंह कंबोज का। कंबोज ने बताया कि वे इस टॉय ट्रेन में सवारी कर चुके हैं, लेकिन आज इंद्रा हॉलीडे होम के बदले हुए  हालातों को देखकर अफसोस होता है कि कहां जवाहर लाल  नेहरू बच्चों के भविष्य को बनाने का सपना संजोए इस होम का निमार्ण करके गए थे। आज यह होम का भविष्य धुंधला होता जा रहा है। इसमें लापरवाही चंडीगढ़ प्रशासन की है। प्रशासन की अनदेखी के चलते ही टॉय ट्रेन और उसकी पटरियां का नामोनिशान लगभग खत्म हो चुका है।

डी.सी. का यह था कहना
इस बारे में जब डी.सी.  अजीत बाला जी जोशी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इंद्रा हॉलीडे मेरे अंडर नहीं आता। आप संबंधित अधिकारियों से इसे लेकर बात करें।

61 वर्ष पुरानी टॉय ट्रेन का नामोनिशान नहीं
जवाहर लाल नेहरू के प्रयासों से 1956 में इस टॉय ट्रेन को शुरू किया गया था। जिसकी सैर करने के लिए स्कूलों के बच्चे भी इंद्रा होलीडे होम आते थे। इस ट्रेन के हर डिब्बे में 20 बच्चे बैठ सकते थे। बता दें कि 1997 में यह ट्रेन खराब होने के कारण कुछ समय के लिए बंद हो गई थी, लेकिन 2003 में फिर से मिक्की-वे एंटरटेनमैंट ग्रुप द्वारा शुरू किया गया। लेकिन फंड की कमी के चलते यह 2006 तक बंद हो गई। इस ट्रेन के चलने के लिए बिछाए गए ट्रैक का अब कुछ हिस्सा ही देखने को बचा है और वह भी मिट्टी में धंसा हुआ है।

आखिर कहां गई टॉय ट्रेन?
टॉय ट्रेन तो बंद हो गई, लेकिन इस ट्रेन में सवारी कर चुके लोगों के दिमाग में एक प्रश्न जरूर आता है कि आखिरकार वह टॉय ट्रेन कहां गई, जिसे बच्चों के लिए बनाया गया है। इस सवाल का उत्तर जानने के लिए जब इंद्रा होलीडे होम में काम कर रहे लोगों से पूछताछ की गई तो पता चला कि इस टॉय ट्रेन को सुरंग में ही कैद कर दिया गया है। जबकि हैरिटेज का रूप ले चुकी इस टॉय ट्रेन को रेल प्रशासन द्वारा फिर से ठीक किया जा सकता था। बतां दे कि इस टॉय ट्रेन को लखनऊ रेलवे के डी.आर.एम द्वारा डोनेट किया गया था। भारत में ही तैयार हुई इस ट्रेन को यदि प्रशासन चाहता तो ठीक करवाकर फिर से शुरू कर सकता था और नहीं  तो कम से कम से इसे किसी म्यूजियम में भी खड़ा किया जा सकता था।

रेलवे स्टेशन हुआ मैडीकल सैंटर में तब्दील
इस ट्रेन के बंद होने के बाद धीरे-धीरे इसका स्टेशन भी मैडीकल सैंटर का रूप लेते चला गया। बताया जा रहा है कि बहुत पहले यहां केवल दो मैडीकल टैस्टों ब्लड व यूरीन टैस्ट के लिए लैब शुरू हुई थी, लेकिन आज हालात यह हैं कि पूरे रेलवे स्टेशन को मैडीकल सैंटर का रूप दे दिया गया है। जहां जिस खिड़की में पहले इस टॉय ट्रेन में सवारी करने के लिए बच्चे टिकट लेने के लिए लाइनों में लगते थे। आज उसी खिड़की में मरीज अपने टैस्टों की पर्ची बनवाने के लिए लाइनों में लगे नजर आतें हैं।

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