बस भीड़ जुट गई और लाज बच गई

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Monday, November 25, 2013-11:38 AM

नई दिल्ली( अशोक शर्मा ): सीलमपुर के शास्त्री पार्क रैली में भीड़ जुट गई और नेताओं की लाज बच गई। सोनिया गांधी की रैली इससे पहले मंगोलपुरी और दक्षिणपुरी में राहुल गांधी की फीकी रहीं 2 रैलियों की तुलना में अच्छी रही। रैली संपन्न होने के बाद कांग्रेस के कई नेताओं के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही थी। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित उस समय काफी खुश दिखाई दीं जब सोनिया गांधी ने दिल्ली सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों की तारीफ की।

रैली को सम्बोधित करते हुए  सोनिया गांधी आज कुछ तीखे तेवर के साथ जोशीले अंदाज में दिखीं। मंच पर चढ़ते ही जब उन्होंने भीड़ का अभिवादन स्वीकार किया, तो भी वह प्रसन्न दिखाई दे रही थीं। इस रैली को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल कई दिनों से कड़ी मशक्कत कर रहे थे। विधायकों की क्लास ले रहे थे। दोनों नेताओं का एजेंडा एक ही था कि किसी भी तरह से रैली सफल साबित होनी चाहिए।

इतना ही नहीं इस रैली के आयोजन को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद जयप्रकाश अग्रवाल की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी हुई थी क्योंकि उन्हीं के संसदीय क्षेत्र में इस रैली का आयोजन किया गया था। रैली को सफल बनाने के लिए पार्टी ने कई प्रत्याशियों को भी भीड़ जुटाने का आदेश दिया था लेकिन कुछ प्रत्याशी तो मात्र कुछेक समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे जबकि कुछ 5-5 सौ समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे।

हालांकि सोनिया गांधी ने रैली को सम्बोधित करते हुए विपक्ष के किसी भी नेता का नाम तो नहीं लिया लेकिन उन्हें नसीहत देते हुए इतना जरूर कहा कि कोई अपनी आंखों पर पट्टी बांध ले और उसे दिल्ली में हुआ विकास ही दिखाई नहीं दे, उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।  रैली को सम्बोधित करते हुए सोनिया गांधी ने उत्तर भारत में प्रचलित कहावत जैसे हाथ कंगन को आरसी क्या.... आदि का भी बखूबी प्रयोग किया।


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