जाटों की पोजिशन दांव पर

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Friday, November 29, 2013-2:46 PM

नई दिल्ली (सज्जन चौधरी): इस बार दिल्ली विधान सभा चुनावों में जाटों की नंबर 1 की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। जातिगत आधार पर देखें तो दिल्ली में सबसे अधिक 11 जाट विधायक हैं। 2008 विधान सभा चुनावों से पहले दिल्ली विधान सभा चुनावों में पंजाबी और वैश्य समुदाय के लोगो का दबदबा रहता था।

पिछले चुनावों में परिसीमन लागू होने के बाद जाटों ने दिल्ली विधान सभा पर कब्जा जमाया है। पिछले चुनावों में कांगे्रस ने 7 तो भाजपा ने 11 जाटों को प्रत्याशी बनाया था। कांग्रेस के 7 में से छ: प्रत्याशियों ने जीत हांसिल की थी, तो भाजपा के 11 में चार प्रत्याशी विधान सभा पहुंचे थे। एक जाट प्रत्याशी निर्दलीय चुनाव जीत कर विधान सभा की दहलीज तक पहुंचा था।

पिछले चुनावों में 6 सीटों पर जाटों का मुकाबला जाटों से तो पांच सीटों पर दूसरी बिरादरी के लोगों से था। इस बार देखना यह होगा कि कितने जाट दिल्ली विधान सभा में पहुंच पाते हैं। इस बार कांग्रेस ने 12 तो भाजपा ने 11 जाटों को टिकट दिया है। जाट प्रत्याशियों की सफलता को देखते हुए कांग्रेस ने पिछली बार के 7 के मुकाबले इस बार 12 जाटों को प्रत्याशी बनाया है। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने पिछली बार की असफलता से आहत न होकर इस बार भी 11 जाटों को प्रत्याशी बनाया है।


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