सरकार नहीं कह सकती कि कंपनियां सीएसआर धन कैसे खर्च करे: पायलट

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Saturday, December 21, 2013-1:42 PM

नई दिल्ली: कंपनियों के सामाजिक दायित्व पर खर्च से जुड़े नए नियमों के संबंध में केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट ने आज कहा कि केंद्र अथवा राज्य सरकार कंपनियों को यह नहीं कह सकतीं हैं कि वह सामाजिक कल्याण की गतिविधियों पर धन कैसे खर्च करे। नए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कुछ खास श्रेणियों की मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को कार्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) गतिविधियों में अपने पिछले तीन साल के औसत मुनाफे की दो प्रतिशत राशि खर्च करनी होगी।

 

यह नियम 2014-15 से लागू होगा। कार्पोरेट कार्य मंत्रालय ही इस कानून को लागू कर रहा है जिसके मुखिया सचिव पायलट हैं। उन्होंने कहा कि सीएसआर गतिविधियों पर धन कैसे खर्च किया जाए यह फैसला अंतत कंपनी निदेशक मंडल को ही करना है। पायलट ने यहां एक समारोह में कहा ‘‘एक बात बिल्कुल साफ है कि मंत्रालय या सचिव या राज्य सरकार कोई आपको यह नहीं कह सकती कि सीएसआर पर धन कैसे खर्च किया जाना चाहिए।’’

 

उन्होंने कहा ‘‘सीएसआर पर धन कैसे खर्च किया जाए, इस मामले में हम आपको कोई निर्देश अथवा सलाह नहीं देना चाहते हैं।’’ सरकार नए कंपनी अधिनियम के तहत नियम कायदों को अंतिम रूप देने में लगी है। उन्होंने कहा ‘‘हमने सुनिश्चित किया है कि पर्यावरण, पारिस्थितिकी, वन्य जीवन ये सभी उन क्षेत्रों में शामिल हो जहां कंपनियां अपने सामाजिक दायित्व के तहत धन खर्च करना चाहती हैं।’’ कंपनी अधिनियम 2013 करीब 60 साल पुराने कंपनी कानून की जगह लेगा।

 

नए कंपनी कानून के तहत सालाना 1,000 करोड़ रपए अथवा इससे अधिक कारोबार करने वाली या फिर 500 करोड़ रपए अथवा इससे अधिक नेटवर्थ वाली या फिर ऐसी कंपनियां जिनका मुनाफा पांच करोड़ रुपए या इससे अधिक होगा, उन्हें अपने पिछले तीन साल के औसत मुनाफे का 2 प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों में खर्च करना होगा।


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