मिर्जापुर की मलाला ने महिलाओं को शिक्षित कर किया कमाल

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Wednesday, January 08, 2014-3:21 PM

 मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में एक आदिवासी बालिका ने महिलाओं को शिक्षित कर सराहनीय काम किया है और इस असाधारण कार्य के लिये राष्ट्रपति पुरस्कार के लिये उसका नाम चुना गया है। पाकिस्तान में जो काम मलाला ने किया. वही काम यह लडकी सविता भारत में कर रही है। इससे पहले देश की एक नामी गिरामी पत्रिका इण्डिया टुडे की ओर इस 13 वर्षीय बालिका सविता को पुरस्कृत किया जा चुका है। सविता शिक्षा के क्षेत्र में अति पिछडे आदिवासी बहुल क्षेत्र लालगंज के महुलार गांव निवासी सरजू की पुत्री है। वह पास के गांव में सरस्वती विद्या मन्दिर में कक्षा सात की छात्रा है1 सविता के वल पढती ही नहीं है बल्कि अपने टोला गांव आस पड़ोस की अशिक्षित आदिवासी महिलाओं को साक्षर बना रही है। सविता ने कई अशिक्षित महिलाओं को हस्ताक्षर बनाने लायक बना दिया है। कुछ महिलाएं अब पढने भी लगी हैं।

सविता का यह कार्य अब उसके लिए एक जुनून बन चुका है। सविता अब एक छात्रा एवं चंचल बालिका ही नहीं बल्कि एक गभीर शिक्षिका बन चुकी है। आदिवासी महिलाएं बेझिझक उससे पढती हैं। दरअसल इस पूरे इलाके में शिक्षा का प्रकाश अभी तक कम ही पहुंचा है। यहां की 95 फीसदी आदिवासी महिलाएं निरक्षर हैं। वे मजदूरी कर अपना जीवन यापन करती हैं। सविता इन्हीं महिलाओं के बीच से निकली एक बालिका है जिसे खुद विद्यालय का मुहं देखने के लिए कम पापड नहीं बेलने पडे। उसकी भाभी महिमा ने उसे स्कूल तक पहुंचाया और उसके बाद सविता ने पीछे मुडकर नहीं देखा। आज उसकी मां सुमित्रा और पिता सरजू खुद गर्व महसूस करते हैं। उत्तर प्रदेश बाल कल्याण परिषद ने बाकायदा इसके चयन का पत्र भेजा है तथा बायोडाटा मांगा है। सब कुछ ठीक रहा तो जिले की यह आदिवासी बाला आगामी 26 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से पदक प्राप्त करेगी। सविता आज आदिवासी समाज के लिए गौरव बन चुकी है


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