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नस्लीय भेदभाव:चिंकी,चाउमीन,मोमोज कहकर बुलाते हैं लोग

  • नस्लीय भेदभाव:चिंकी,चाउमीन,मोमोज कहकर बुलाते हैं लोग
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Sunday, February 09, 2014-1:06 PM

नई दिल्ली: पूर्वोत्तर के राज्यों से राजधानी में आने वाले अधिसंख्यक युवाओं को राष्ट्रीय राजधानी में अपने रोजमर्रा के जीवन में नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ता है जो खुद को महानगरीय शहर कहलाता है। अक्सर ‘‘चिंकी’’ ‘‘चाउमीन’’ तथा ‘‘मोमोज’’ कहकर बुलायी जाने वाली पूर्वोत्तर की युवा पीढ़ी का कहना है कि उन्हें इस भेदभाव का विरोध करना पड़ता है और अपने साथियों द्वारा उनके खिलाफ की जाने वाली टिप्पणियों से संघर्ष करना पड़ता है।

असम, नागालैंड, मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश, मेघालय , मिजोरम , त्रिपुरा और सिक्किम जैसे आठ पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले युवा राजधानी में बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसरों की उम्मीद में यहां आते हैं। पूर्वोत्तर के क्षेत्रों की महिलाओं को सर्वाधिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है क्योंकि उन्हें गुडग़ांव और नोएडा जैसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रों में रोजमर्रा की जिंदगी में भारी मानसिक उत्पीडऩ से दो चार होना पड़ता है।

चाहे फिर सार्वजनिक परिवहन सेवाएं हों या शैक्षणिक संस्थान या कार्यस्थल। पूर्वोत्तर के लोगों का मानना है कि तथाकथित मुख्य भारत से ताल्लुक रखने वाले लोग उनके साथ उनके नैन नक्श,हेयर स्टाइल,पहनावे और भाषा को लेकर भारी भेदभाव करते हैं। भारत के अभिन्न हिस्सों से संबंध रखने के बावजूद नस्लीय उत्पीडऩ का शिकार होने वाले ये लोग मानसिक,शारीरिक और मौखिक हमलों को नजरअंदाज करने को मजबूर हो जाते हैं। मणिपुर से सोशलॉजी द्वितीय वर्ष की छात्रा पेमिला कहती हैं कि उनसे अक्सर उनकी राष्ट्रीयता के बारे में सवाल किया जाता है।

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