रंग के कैप्सूल और पटाखों की लड़ी

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Monday, March 17, 2014-12:41 AM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): होली पर अगर आपके पास कोई दवाई के कैप्सूल लेकर आए तो सावधान हो जाइये। हो सकता है वह रंगों से भरा हो। चुपचाप चार कैप्सूल बाल्टी में डालकर कहीं कोई आपको रंगों से नहाला न दे।

इतना ही नहीं पटाखों की लड़ी जलने लगे तो उसके पास खड़े होना खतरे से खाली नहीं है। आप खड़े-खड़े रंगीन धुएं से नहा जाएंगे। होली बम के साथ ही आई इन दो चीजों ने होली के बाजार में धूम मचा रखी है। बच्चों को यह दोनों ही चीजे बहुत भा रही है।


शाी पार्क के दुकानदार मनोज गर्ग ने बताया कि होली के रंगों का यह कैप्सूल देखने में दवाई की तरह ही लगता है। कोई यह सोच भी नहीं पाएगा कि इसमें रंग भरे हुए है। तीन-चार कैप्सूल एक बाल्टी पानी में डाल देने से रंग फैल जाएगा। फिर इसे किसी के भी उपर डाला जा सकता है। इन कैप्सूल का एक डिब्बा तीस रुपये में है। इसमें लगभग 50 कैप्सूल है।

इसी तरह तर्ज पर पटाखों की लड़ी भी बाजार में आई है। इस लड़ी में आग लगाते ही रंगीन धुआं चारों तरफ फैल जाता है। इससे पूरा माहौल रंगीन हो जाता है। बच्चों को लड़ी बड़ी अजीब लग रही है कि पहले तो इसे जलाने पर आवाज होती थी, अब सिर्फ रंगीन धुआं कैसे निकल रहा है।

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