सबक सिखाने के मूड में हैं ग्रामीण

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Monday, March 31, 2014-3:21 PM

नई दिल्ली (राजन शर्मा) : वेस्ट दिल्ली लोकसभा सीट पर ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के खोखले दावे नेताओं पर भारी पड़ रहे है। सुधार के नाम पर लोकसभा के अंर्तगत अस्पताल निर्माण की परियोजना बनाई गई, लेकिन आज तक अस्पतालों का निर्माण चारदीवारी से आगे नहीं बढ़ा। वहीं, मौजूदा समय में (ग्रामीण/ शहरी) क्षेत्र में जो अस्पताल हैं उनमें  ब्लड बैंक, पैथोलॉजी लैब और बर्न वार्ड आदि की कमी है।

इसके परिणाम स्वरूप चुनावों के दौरान प्रचार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में पहुंच रहे उम्मीदवारों को विरोध का समाना करना पड़ रहा है। वेस्ट दिल्ली के द्वारका, बापरौला, हस्तसाल समेत कई ऐसी विधानसभाएं हैं, जहां अस्पताल निर्माण के लिए कई बार शिलान्यास किया गया, लेकिन कभी अस्पताल बनकर शुरू नहीं हुआ।

इनमें सरकार के मंत्री और सांसदों  की  बनाई गई परियेाजना शामिल रहीं। इनमें बापरौला में 100 बिस्तर, हस्तसाल में 200, द्वारका में 500 व 750 बिस्तरों के अस्पतालों में मंजूरी तो मिल गई, लेकिन निर्माण के नाम पर शुरूआत नहीं हो पाई है। लोगों को अब भी सैन्ट्रल दिल्ली स्थित अस्पतालों के भरोसे रहना पड़ रहा है। 

द्वारका और हस्तसाल स्थित अस्पतालों  की परियोजनाओं में कई बार शिलान्यास हुआ। द्वारका स्थित अस्पताल का शिलान्यास पहली बार स्वास्थ्य मंत्री योगानंद शास्त्री ने किया। उसके बाद स्वास्थ्य मंत्री किरण वालिया और ए.के वालिया भी इसका शिलान्यास कर चुके हैं, लेकिन अस्पताल का निर्माण वर्तमान में भी शुरू नहीं हो पाया। वहीं, बुराड़ी स्थित अस्पताल का भी यही हाल है।

6 लाख लोग अस्पताल 1 

पश्चिमी दिल्ली के देहात इलाके में सरकार का एकमात्र राव तुला राम स्मारक अस्पताल मौजूद हैं। इस अस्पताल में लंबे समय से कई विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से वार्ड बंद होने की कगार पर हैं। रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते अल्ट्रासाऊंड की मशीने बंद हैं और इलाके में बर्न वार्ड तो किसी अस्पताल में है ही नहीं। अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी से लोग अस्पताल में जाना बंद कर चुके हैं। 

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