परिवार के लिए प्यार का बलिदान दे देती हैं भारत की बेटियां: सुप्रीम कोर्ट

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Monday, June 19, 2017-1:38 PM

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने भारत की बेटियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक व्यक्ति की उम्रकैद की सजा को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि भारत में माता-पिता के फैसले को स्वीकार करने के लिए महिलाओं का अपने रिश्तों का बलिदान करना बहुत ही आम बात है। मामला राजस्थान के जयपुर का है जहां व्यक्ति ने एक महिला से गुपचुप शादी की और इसके तुरंत बाद दोनों ने खुदकुशी कर ली, जिसमें व्यक्ति जीवित बच गया, जबकि 23 वर्षीय पीड़िता को बचाया नहीं जा सका। इस घटना में पुलिस ने व्यक्ति के खिलाफ पीड़िता की हत्या का मामला दर्ज किया।

अपने प्यार का बलिदान देना इस देश में आम बात
शीर्ष अदालत ने यह उल्लेख किया कि हो सकता है महिला अनिच्छा से अपने माता-पिता की इच्छा को मानने के लिए राजी हो गई हो लेकिन घटनास्थल पर फूलमाला, चूडिय़ां और सिंदूर देखे गए। इन दृश्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि बाद में उसका मन बदल गया। जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की एक पीठ ने कहा कि इस देश में यह आम बात है कि बेटियां अपने माता-पिता की इच्छा को स्वीकार करने के लिए अपने प्यार का बलिदान कर देती हैं, भले ही ऐसा वह अनिच्छा से करती हों।

सुप्रीम कोर्ट ने किया व्यक्ति को बरी
कोर्ट ने कहा कि पीड़ित और आरोपी एक-दूसरे से प्यार करते थे और लड़की के पिता ने अदालत के समक्ष यह गवाही दी थी कि जाति अलग होने के कारण उनके परिवार ने इस शादी के लिए रजामंदी नहीं दी थी। व्यक्ति को कथित तौर पर उसकी प्रेमिका की हत्या करने का दोषी ठहराते हुए निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी और इस फैसले की राजस्थान हाई कोर्ट ने भी पुष्टि की थी। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि परिकल्पना के आधार पर आपराधिक मामलों के फैसले नहीं किए जा सकते और उसने व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि पर्याप्त संदेह के बावजूद अभियोजन पक्ष उसका दोष सिद्ध करने में सक्षम नहीं रहा है।

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