आतंकी हमले की आशंका: माता वैष्णो देवी दरबार की सुरक्षा में लगे 100 एन.एस.जी. कमांडो

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Saturday, January 13, 2018-9:08 AM

जालंधर: खुफिया एजैंसियों ने साऊथ कश्मीर में बड़े आतंकी हमले की संभावना जताई है। हमले की आशंका के मद्देनजर माता वैष्णो देवी के दरबार की सुरक्षा की जिम्मेदारी एन.एस.जी. के ब्लैक कैट कमांडो को दी गई है। सूत्रों के मुताबिक आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर के बाद जम्मू के कटड़ा स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर सबसे बड़ा आस्था का केंद्र है और दोनों बड़े धार्मिक स्थल आतंकियों के निशाने पर हैं। यही वजह है कि एन.एस.जी. के 100 कमांडो को कटड़ा में तैनात किया गया। एन.एस.जी. कमांडो ने बीते दिनों माता वैष्णो देवी के दरबार के प्रवेश और निकासी द्वारों की सुरक्षा का जायजा लिया। हालांकि एन.एस.जी. के मुताबिक मंदिर पर हमले को लेकर कोई विशेष इनपुट नहीं मिला है लेकिन यह ड्रिल स्टैंडर्ड ऑप्रेटिंग प्रोसीजर के तहत है। उल्लेखनीय है कि माता वैष्णो देवी मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, खास तौर पर नवरात्र के दिनों में माता का दरबार रात-दिन भक्तों के लिए खुला रहता है। माता वैष्णो देवी का दरबार कटड़ा से 13 किलोमीटर जबकि जम्मू से 46 किलोमीटर की दूरी पर है। 

गृह मंत्रालय के आदेश पर तैनाती
बीते साल साऊथ कश्मीर में सी.आर.पी.एफ. कैम्पों पर हुए आतंकी हमलों और अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले के बाद खुफिया एजैंसियों द्वारा दी गई सूचनाओं के आधार पर गृह मंत्रालय ने साऊथ कश्मीर में एन.एस.जी. कमांडो की तैनाती की है।  एन.एस.जी. का फोकस शहरी कोर ऑप्रेशन, शहरी युद्ध और रूम इंटरवैंशन है। इस तैनाती का मकसद जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन द्वारा हमले के अपनाए जा रहे तरीकों और बारीकियों के संबंध में सी.आर.पी.एफ. और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को प्रशिक्षित करना है।

 6 महीने से सी.आर.पी.एफ. और जम्मू-कश्मीर पुलिस को टेनिंग दे रहे कमांडो 
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एन.एस.जी. जवान सी.आर.पी.एफ. और जम्मू-कश्मीर पुलिस कैम्प में करीब 6 महीने से ट्रेङ्क्षनग दे रहे हैं। एन.एस.जी. महानिदेशक सुधीर प्रताप सिंह के मुताबिक कमांडो कश्मीर घाटी में हैं जहां वे सी.आर.पी.एफ . और जम्मू-कश्मीर पुलिस को ट्रेनिंग दे रहे हैं। ट्रेङ्क्षनग के साथ-साथ एन.एस.जी. कमांडो जवानों से कश्मीर के चप्पे-चप्पे की जानकारी हासिल कर सुरक्षा की स्ट्रैटजी तैयार कर रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि सी.आर.पी.एफ. कैम्पों में टेनिंग लेने के बाद जवानों ने फोर्स ज्वाइन नहीं की। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए जहां सुरक्षा कर्मी हथियार समेत गायब हो गए। ऐसे लोगों से ज्यादा खतरा हो सकता है क्योंकि ये फोर्स के काम करने का तरीका जानते हैं। ऐसे में जाहिर है कि अगर ये जवान आतंकी कैम्प में शामिल हो जाते हैं तो सुरक्षा कर्मियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकते हैं।

सी.आर.पी.एफ. कैम्पों पर आतंकी फिदायीन हमले
बीते महीनों में जम्मू-कश्मीर में सी.आर.पी.एफ. कैम्पों पर कई आतंकी हमले हो चुके हैं। अभी 10 दिन पहले ही पुलवामा जिले में हथियारबंद आतंकियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.) के ट्रेङ्क्षनग कैम्प पर हमला कर दिया था, जिसमें 5 सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए। हालांकि सुरक्षा बलों ने मौके पर ही 2 आतंकियों को मार गिराया। यह फिदायीन हमला पुलवामा जिले के लेथपोरा में सैंट्रल रिजर्व पुलिस बल के कैम्प पर आधी रात 2.15 बजे सी.आर.पी.एफ. की 185वीं बटालियन के कैम्प में हुआ था। सी.आर.पी.एफ. के मुताबिक आतंकियों ने पहले हथगोला फैंका और उसके बाद फायरिंग शुरू कर दी। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा में भी आतंकवादियों ने सी.आर.पी.एफ. कैम्प पर आतंकी हमला कर दिया था, जिसमें सुरक्षा बलों ने 4 आतंकवादियों को मार गिराया था।

अमरनाथ यात्रियों पर हो चुका आतंकी हमला
बीते साल जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा कर लौट रहे यात्रियों की बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। इस हमले में 7 यात्रियों की मौत हो गई थी और 14 यात्री जख्मी हो गए थे। हमला सी.आर.पी.एफ. के काफिले को निशाना बनाकर किया गया था। इसी दौरान बस भी चपेट में आ गई। हमला 2 अलग-अलग जगहों पर हुआ था। हमले के वक्त बस में करीब 60 से ज्यादा यात्री सवार थे।

एन.एस.जी. का काऊंटर टैरर ऑप्रेशन में विरोध  
सूत्रों के मुताबिक आतंकवाद से ग्रस्त साऊथ कश्मीर में एंटी हाईजैक (अपहरण विरोधी) और एंटी टैरर ऑप्रेशन के लिए स्पैशल एक्शन ग्रुप का गठन किया गया है। वहीं सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि एन.एस.जी. की तैनाती का सेना काऊंटर टैरर ऑप्रेशन में विरोध कर रही है और एन.एस.जी. को सी.आर.पी.एफ. जवानों को प्रशिक्षण देने के लिए तैनात कर दिया गया है। प्रशिक्षण के लिए एन.एस.जी. के 40 जवानों की स्पैशल ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि यह भी पता चला है कि एन.एस.जी. की तैनाती सेना के साथ उच्च स्तर पर वार्ता के बाद ही की गई है।


 

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