चुनाव आचार संहिता : क्यों और कैसे?

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Monday, March 31, 2014-11:27 AM

चुनाव आचार संहिता (आदर्श आचार संहिता) का मतलब है चुनाव आयोग के वे निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उसके उम्मीदवार को करना होता है। अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। उसे चुनाव लडऩे से रोका जा सकता है। उम्मीदवार के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।

राज्यों में अथवा केन्द्र में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती है। चुनाव आचार संहिता के लागू होते ही प्रदेश सरकार, केन्द्र सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग जाते हैं। सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं। वे आयोग के मातहत रहकर उसके दिशा-निर्देश पर काम करते हैं।

इसलिए लोकसभा चुनावों के दृष्टिगत आदर्श आचार संहिता के लागू होते ही सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग गए हैं। सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन गए हैं। वे आयोग के मातहत रहकर उसके दिशा-निर्देश पर काम करेंगे।

एम.एल.ए., मुख्यमंत्री या मंत्री अब न तो कोई घोषणा कर सकेंगे न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन। सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो। राजनीतिक दलों के आचरण और क्रिया-कलापों पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है।    

                                                                                                                                                                                  (एम सी एन)


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