लोहड़ी में दिखाई देता है पंजाब की लोक संस्कृति का रंग

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Sunday, January 12, 2014-2:27 PM

नई दिल्ली: मौज मस्ती और खुशियां मनाने की पंजाबी संस्कृति की झलक हर साल तेरह जनवरी को मनाए जाने वाले लोहड़ी पर्व में पूरे शबाब पर दिखाई देती है। लोहड़ी का त्योहार पंजाब में ही नहीं बल्कि पड़ोसी हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और अन्य उत्तरी राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंजाब में गेहूं की फसल अक्तूबर में बोई जाती है और मार्च में काटी जाती है। लोहड़ी पर्व तक यह पता चल जाता है कि फसल कैसी होगी इसलिए लोहड़ी के समय लोग उत्साह से भरे रहते है।

 

पंजाब में लोहडी के दिन सरसों का साग, मक्की की रोटी तथा गन्ने के रस और चावल से बनी खीर बनाई जाती है। नृत्य पंजाब की संस्कृति का एक अहम हिस्सा होता है। लोहड़ी के दिन लोग खूब भांगड़ा करते हैं और शाम होते ही सूखी लकडिय़ां जलाकर नाचते-गाते है। यह सिलसिला देर रात तक चलता है। ढोल की थाप पर थिरकते लोग रेवडी, मूंगफली का स्वाद लेते हुए नाचते गाते हैं। लोहडी को लेकर युवाओं में कुछ अधिक ही उत्साह रहता है।

 

युवक युवतियां शाम होते ही सजधज कर अग्नि प्रज्वलित करके नाचते गाते है। उनकी खुशी देखते ही बनती है। दिल्ली में भी लोहडी बडे उत्साह के साथ मनाई जाती है। दिल्ली में पंजाबी लोगों की अच्छी खासी तादाद है और इस पर्व को राजधानी में भी मौजमस्ती के साथ मनाया जाता है। केवल पंजाबी समुदाय के लोग ही नहीं बल्कि हर समुदाय के लोग इस पर्व को मनाते हैं और इसका पूरा लुत्फ उठाते है। लोहड़ी के दिन लकडियां प्रज्वलित करके लोग उसके चारों और नाचते-गाते हैं और मूंगफली तथा गजक खाते हुए चक्कर लगाते हैं। लोहडी के दिन कुछ विशेष गीत भी गाए जाते हैं। इन गीतों में ये गीत भी शामिल हैं:
                       सुन्दर मुन्द्ररिये हो, तेरा कौन वेचारा हो
                       दुल्ला भट्टी वाला हो, दुल्ले धी बिआई हो
                          सेर सकर पाई हो।


               लोहड़ी के दिन यह गीत भी खूब गाया जाता है-
                            देह माई लोहडी
                           जीवे तेरी जोडी
                           तेरे कोठे ऊपर मोर 
                        रब्ब पुत्तर देवे होर
                       साल नूं फेर आवां।

  लोहडी पर्व आग और सूर्य को समर्पित होता है। इस दौरान सूर्य मकर राशि से उत्तर की ओर आ जाता है। अग्नि देवता का आध्यात्मिक महत्व भी होता है। लोग पापकार्न, मूंगफली, रेवडी, गजक, मिठाइयां आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं। किसानों के लिए लोहडी का विशेष महत्व है। वे इसे रबी की फसल पकने की खुशी में मनाते है। इस अवसर पर अग्नि को नमन करते हुए किसान अच्छी फसल की कामना करते हैं।


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