16 फरवरी 2020 के गलत मुहूर्त ने अरविंद केजरीवाल को सत्ता से जेल पहुंचाया

Edited By Prachi Sharma,Updated: 23 Mar, 2024 09:01 AM

arvind kejriwal

16 फरवरी 2020 को अरविंद केजरीवाल ने प्रात: 10 के बाद आत्मघाती अष्टम चंद्रमा में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। तब शपथ ग्रहण पर प्रख्यात ज्योतिषी एवं धर्मगुरु पं. राजीव ‘शूर’ ने भविष्यवाणी की थी

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कंडाघाट (स.ह.): 16 फरवरी 2020 को अरविंद केजरीवाल ने प्रात: 10 के बाद आत्मघाती अष्टम चंद्रमा में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। तब शपथ ग्रहण पर प्रख्यात ज्योतिषी एवं धर्मगुरु पं. राजीव ‘शूर’ ने भविष्यवाणी की थी यह गलत मुहूर्त अरविंद केजरीवाल को सत्ता विहीन करेगा। शनि न्यायाधीश का प्रतीक घोटाले का खुलासा करेगा और शनि की क्रूर दृष्टि सजा दिलाएगी जोकि 4 वर्षों बाद सत्य साबित हो रही है।

ज्योतिषी एवं धर्म गुरु पं राजीव शर्मा शूर ने बताया कि इस बार भी अरविंद केजरीवाल की कुंडली में ‘कालसर्प योग भी उनका मारकेश बना चुका था। वर्ष 2023 में जब उनकी उत्पति वृष लगन में मेष राशि के अंतर्गत भरणी नक्षत्र में शुक्रवार की मध्य रात्रि को हुई थी जोकि गिरफ्तारी के समय भी गुरुवार ही था जिसमें उनका जन्मवार हुआ इस दिन की घर से रवानगी लम्बी होती है। इसके कारण उनको ओर दिक्कतें बढ़ाएगा।

पं. शूर ने पिछले 34 वर्षों से शोध में जो पाया वह गलत मुहूर्तों के कारण हानि की भविष्यवाणी अधिकांश सत्य हुईं। इस कारण अनेक दिग्गज राजनीति में हारे और करियर ही समाप्त कर बैठे। केजरीवाल की कुंडली में वृष लगन में मेष राशि का उनका जन्म हुआ जिसमें वर्तमान में ‘काल सर्प योग’ का मारकेश गोचर का भी और महादशा गुरु में राहू अंतर और प्रत्यंतर शनि का अति सूक्ष्म गुरु-शनि अंतर 20 मार्च 2024 से 7 अप्रैल 2024 तक अति घातक और 18 मार्च 2026 तक शुरू में राहू का अंतर गुरु चंडाल योग बहुत पीड़ा कारक रहेगा।

अभी हाल ही में शनि उदय हुआ है जिसमें मंगल कुंभ राशि में प्रवेश भी 15 फरवरी को हुआ फिर अगले दिन 16 फरवरी 2024 ही शनि उदय होने की स्थिति न्यायाधीश शनि की क्रूर दृष्टि पड़ने पर बेल की जगह जेल दिखा दी। कालसर्प योग और शनि निवारण के समाधान के बिना जेल से बाहर आने में दिक्कतें पैदा होंगी। पं. राजीव शर्मा शूर ने खुलासा किया कि हाल के चुनाव में धुरंधर हारे और जल्द गलत मुहूर्त होने से परिणाम भी प्रभावित होते दिखेंगे। वेदों में ज्योतिष विज्ञान को चक्षु यानी नेत्र बोला गया है। 

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