Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 Oct, 2026 12:17 PM

पितृ पक्ष का समापन जल्द ही होने वाला है। पितृपक्ष समाप्ति के साथ ही सर्वपितृ अमावस्या का पावन अवसर आता है। हिंदू धर्म में इस तिथि को पितरों की तृप्ति, शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
Sarva Pitru Amavasya Pitra Dosh Remedies : पितृ पक्ष का समापन जल्द ही होने वाला है। पितृपक्ष समाप्ति के साथ ही सर्वपितृ अमावस्या का पावन अवसर आता है। हिंदू धर्म में इस तिथि को पितरों की तृप्ति, शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। यदि आपके परिवार या वंश में 8 पीढ़ियों या कई सालों से पितृ दोष चल रहा है, जिसके कारण घर में बहुत सारी परेशानियों जैसे- आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति, विवाह में बाधाएं या तरक्की में रुकावटें बनी हुई हैं, तो सर्वपितृ अमावस्या क दिन इसे शांत करने का एक श्रेष्ठ महाउपाय प्रदान करता है। माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या के शुभ दिन पर घर की दिश या पवित्र स्थान पर कुछ विशेष पौधारोपण करने से पितर बहुत अत्यंत प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। तो आइए जानते हैं कि वे कौन से 3 पवित्र पौधे हैं, जिन्हें सर्वपितृ अमावस्या पर लगाने से पितरों का अटूट आशीवार्द मिलता है।
पीपल का पौधा
हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इसक साथ ही पीपल क पितरों का सबसे प्रिय निवास स्थल भी माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन किसी सार्वजनिक स्थान, मंदिर के पा पीपल का पौधा लगाने और उसक देखाल का संकल्प लेने से आठ पीढ़ियों पुराना पितृ दोष शांत होता है।

शमी और तुलसी का पौधा
यदि आपके पास बड़े पेड़ लगाने की जगह नहीं है, तो अपने घर के आंगन या बालकनी में शमी और तुलसी का पौधा लगाना भी विशेष फलदायी होता है। शमी का पौधा न्याय के देवता शनिदेव और भगवान शिव दोनों को प्रिय है, जो पितृ दोष के कड़े दुष्प्रभावों को कम करने में सक्षम है। वहीं विष्णुप्रिया तुलसी का पौधा घर से नकारात्मकता को दूर कर पितरों की आत्मा को बैकुंठ लोक में स्थान दिलाने का माध्यम बनता है।
बरगद का पौधा
बरगद या वट वृक्ष सनातन संस्कृति में अमरता और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या पर बरगद का पौधा लगाना पितृ शांति के लिए अत्यंत फलदायी और अचूक उपाय है। शास्त्रों के अनुसार, वट वृक्ष की छांव में किए गए दान, तर्पण और पौधरोपण का फल कभी समाप्त नहीं होता। यह पौधा परिवार में वंश वृद्धि के मार्ग खोलता है और कुल के सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों को परम शांति प्रदान करता है।

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