अक्टूबर-दिसंबर में पड़ेंगे सुहागिनों के ये 4 खास व्रत, अभी कैलेंडर में नोट कर लें ये महत्वपूर्ण डेट

Edited By Updated: 28 Sep, 2026 01:31 PM

women fasting calendar oct dec 2026

साल 2026 का अंतिम तीन महीने- अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत खास और पावन होने नावा हैं। सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए यह समय त्योहारों की सौगात लेकक आता है।

Women Fasting Calendar Oct Dec 2026 : साल 2026 का अंतिम तीन महीने- अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत खास और पावन होने नावा हैं। सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए यह समय त्योहारों की सौगात लेकक आता है। पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य, संतान के सुखी जीवन और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए रखे जाने वाले कई प्रमुख व्रत इसी अवधि में पड़ रहे हैं। अगर आप भी त्योहारों की तैयारी पहले से करके रखना चाहती हैं, तो अपने कैलेंडर में सुहागिनों के इन 4 प्रमुख व्रतों की सही तारीखें और महत्व अभी से नोट कर लें।

Women Fasting Calendar Oct Dec 2026

करवा चौथ व्रत 
सुहागिनों के लिए साल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पर्व करवा चौथ माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम का प्रतीक है। इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन रखा जाएगा। 

महत्व: इस दिन महिलाएं दिन भर अन्न-जल का त्याग कर शाम को करवा माता और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के हाथों जल पीकर ही यह व्रत खोला जाता है। मान्यता है कि इससे पति को दीर्घायु और निरोगी जीवन का आशीर्वाद मिलता है।

अहोई अष्टमी व्रत
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए रखा जाता है। साल 2026 में अहोई अष्टमी का व्रत 2 नवंबर 2026, सोमवार के दिन रखा जाएगा। 

महत्व: करवा चौथ की तरह ही यह व्रत भी काफी कठिन माना जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और शाम को तारों या चंद्रमा को देखकर जल अर्पित करने के बाद व्रत का पारण करती हैं।

Women Fasting Calendar Oct Dec 2026

छठ पूजा 
लोक आस्था का सबसे महान पर्व छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। बिहार, झारखंड और पूर्वांचल समेत अब पूरे देश में इस पर्व की अलग ही धूम देखने को मिलती है।

चार दिवसीय मुख्य तिथियां:

नहाय-खाय: 13 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

खरना: 14 नवंबर 2026 (शनिवार)

संध्या अर्घ्य : 15 नवंबर 2026, रविवार

उषा अर्घ्य और पारण: 16 नवंबर 2026 (सोमवार)

महत्व: यह 36 घंटे का सबसे कठिन निर्जला व्रत होता है, जिसमें छठी मइया और भगवान सूर्य देव की पूजा की जाती है। यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और आरोग्य जीवन के लिए रखा जाता है।

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तुलसी विवाह 
अक्टूबर-नवंबर के बीच देवउठनी एकादशी के साथ ही सभी मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इसके बाद मार्गशीर्ष और पौष माह में आने वाली एकादशी और तुलसी विवाह का सुहागिनों के लिए विशेष धार्मिक महत्व होता है।  साल 2026 में  तुलसी विवाह 21 नवंबर 2026, शनिवार को पड़ रही है।  

महत्व: तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह कराया जाता है। जिन घरों में यह आयोजन होता है, वहां कन्यादान के समान पुण्य मिलता है और अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।

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