कर्ज होगा अभी और महंगा, बढ़ेगी ईएमआई

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Monday, September 23, 2013-3:33 PM

मुंबई: विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय रिजर्व केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति की चिंताओं के चलते चालू वित्त वर्ष में रेपो दर में आधा प्रतिशत की और बढ़ोतरी करेगा। महंगाई पर अंकुश के लिए नए आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने सभी को हैरान करने वाले एक निर्णय में शुक्रवार को अपनी पहली मौद्रिक समीक्षा में अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर (रेपो) में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी कर दी।

ब्रिटेन के स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के एक अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘रेपो दर में वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि नए गवर्नर वृद्धि से अधिक महंगाई पर ध्यान दे रहे हैं। अब हमें लगता है कि अगली दो मौद्रिक समीक्षा बैठकों में रेपो दर में चौथाई-चौथाई प्रतिशत की और बढ़ोतरी होगी और यह 8 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।’’ जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमूरा का भी अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की और वृद्धि होगी।

क्रेडिट सुईस के अर्थशास्त्रियों ने कोई आंकड़ा न बताते हुए कहा कि उन्हें अगले कुछ माह में रेपो दरों में एक या दो बार और वृद्धि की उम्मीद है। रिजर्व बैंक के कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने कहा कि उन्हें रिण पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए मजबूर होना पड़ेगा। आरबीआई की पिछले सप्ताह घोषित अद्र्धतिमाही समीक्षा में रेपो दर 7.25 से बढा कर 7.5 प्रतिशत कर दी गयी जिसपर वह बैंकों को फौरी जरूरत में केलिए अल्पकालिक नकदी प्रदान करता है।

इसी तरह सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) पर ब्याज दर 0.75 प्रतिशत घटा कर 9.5 प्रतिशत कर दिया। यह एक तरह की दंडात्मक दर होती है जो बैंक अतरिक्त नकदी के लिए बैंकों से वसूलता है।


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