एटीएम से लेन-देन सीमित करना बैंकों के लिए फायदेमंद नहीं

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Sunday, February 16, 2014-3:04 PM

नई दिल्ली: एटीएम से नकदी निकासी की संख्या सीमित करने का प्रस्ताव बैंकों के लिए शायद ही फायदे का सौदा हो क्योंकि विश्लेषकों का कहना है कि एटीएम के मुकाबले शाखाओं के जरिए पैसे का लेन-देन न केवल महंगा है बल्कि इससे बैंक कर्मचारियों पर बोझ भी बढ़ता है। सरकार ने पिछले सप्ताह संसद में कहा था, ‘‘आईबीए ने रिजर्व बैंक को एटीएम से लेन-देन करने की संख्या सीमित करने और एटीएम शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। हालांकि, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।’’  

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने से कहा, ‘‘एटीएम से लेन-देन की संख्या सीमित करना बैंक उद्योग के लिए वाजिब नहीं होगा। बैंक ‘ट्रांजेक्शन वाउचर स्टैटिक्स’ के अनुसार शाखा में जाकर लेन-देन की औसत लागत करीब 58 रुपए है जबकि एटीएम से लेन-देन पर केवल 22 रुपए लागत आती है।’’ ट्रांजेक्शन वाउचर स्टैटिक्स - बैंकों के एटीएम और बैंक शाखा से होने वाले लेनदेन की लागत से जुड़े आंकड़े हैं।

पिछले साल नवंबर में बेंगलूर में कारपोरेशन बैंक एटीएम में एक महिला पर बर्बर हमले के बाद बैंकों को अपने एटीएम पर 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा बल रखने को कहा गया। बैंकों का मानना है कि एटीएम पर हर समय सुरक्षा बल रखना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं है और इससे उनका खर्च बढ़ेगा। इसको ध्यान में रखकर भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने रिजर्व बैंक को एटीएम से होने वाले लेन-देन की संख्या सीमित करने तथा शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि एटीएम से लेन-देन सीमित करने या उस पर शुल्क बढ़ाने से फायदा नहीं होगा। एटीएम के मुकाबले शाखाओं के जरिए लेन-देन महंगा है।


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