टाटा के दो ट्रस्ट से आयकर विभाग ने मांगी इन्वेस्टमेंट डिटेल, गलत निवेश का आरोप

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Saturday, November 19, 2016-2:53 PM

नई दिल्ली: रतन टाटा और सायरस मिस्त्री के बीच जारी बोर्डरूम का विवाद अब भी शांत नहीं हुआ है और यह तब से लेकर अब तक लगातार सुर्खियों में है। आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच जहां एक ओर सायरस मिस्त्री को टी.सी.एस. और टाटा ग्लोबल बेवरेज के चेयरमैन पद से हटाया जा चुका है, वहीं अब आयकर विभाग ने टाटा ग्रुप के दो ट्रस्टों से उनके इन्वेस्टमेंट के बारे में जानकारी मांगी है।

ट्रस्टों में टाटा संस की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी 
जानकारी के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग ने टाटा के जमशेदजी टाटा ट्रस्ट और नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट को 'अनियमित' छूट दी है। इसके चलते सरकार को 1,066 करोड़ रुपए के टैक्स का नुकसान हुआ है। यह दोनों ट्रस्ट सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं। इन दोनों ट्रस्टों की ही टाटा संस में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है।

ट्रस्ट के निवेश पर खड़े हुए थे सवाल 
आपको बता दें कि इन दोनों ट्रस्ट्स के निवेश पर संसद की लोक लेखा समिति ने बड़े सवाल खड़े किए थे। वरिष्ठ आयकर अधिकारियों ने बताया था कि इनमें से एक ट्रस्ट को मिली टैक्स छूट पर भी फिर से विचार किया जा रहा है। टाटा ट्रस्ट के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, लेकिन उन्होंने कुछ और वक्त की मांग की है। आयकर विभाग का यह कदम लोक लेखा समिति द्वारा टैक्स से छूट हासिल करने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थानों और क्रिकेट संस्थाओं पर तैयार की गई रिपोर्ट पर आधारित है।

क्या है आरोप?
जानकारी के मुताबिक जमशेदजी टाटा ट्रस्ट और नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट ने 2009-10 और 2010-11 में कैपिटल गेन के तौर पर 3,139 करोड़ रुपए की कमाई की। टाटा के इन दोनों ट्रस्ट पर इस रकम को गलत तरीके से निवेश करने का आरोप है।


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