आलू के दामों में गिरावट से उड़ी किसानों के चेहरे की रंगत

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Friday, July 07, 2017-11:28 AM

इटावा: ‘आलू’ के दामों में जारी गिरावट का दौर किसानों के अरमानों पर पानी फेर रहा है। अच्छे मुनाफे की आस में किसानों द्वारा आलू की बम्पर पैदावार ने ‘सब्जियों के राजा’ के भाव को जमीन दिखा दी है। आलू उत्पादक किसानों ने इस साल इस उम्मीद के साथ आलू की फसल की पैदावार की थी कि उन्हें अच्छे दाम मिलेंगे मगर मांग की अपेक्षा बढ़ी आपूॢत ने उनकेचेहरे की रंगत उड़ा दी है। आलू के मौजूदा भाव से बिक्री करने पर केवल स्टोरेज का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसान इस उम्मीद से आलू की निकासी नहीं कर पा रहा है कि आगे उसे अच्छा भाव मिले लेकिन यह मुश्किल लगता हुआ दिख रहा है। 30 जून तक कोल्ड स्टोरेजों से मात्र 12 प्रतिशत ही आलू निकासी हुई है।

नोटबंदी के बाद एकदम से आई गिरावट
किसानों का कहना है कि नोटबंदी के बाद से ही आलू के रेट में एकदम से गिरावट आ गई थी मगर उन्होंने इस उम्मीद के साथ नई फसल लेकर तैयार की है कि एक-दो माह में नोटबंदी का असर कम हो जाएगा। 

किसानों को कर्ज की चिंता
कांकरपुरा निवासी किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि उसने कर्ज लेकर आलू की फसल पैदा की थी। उसे ङ्क्षचता है कि वह कहां से कर्ज चुकाएगा। अन्य फसलों की बुआई का समय है लेकिन आलू न बिकने से पैसे की कमी है। सरकार किसानों के हित में कोई काम नहीं कर रही है। सरकार को आलू का निर्यात करना चाहिए।

नहीं मिल रहा कोई खरीदार
किसान प्रदीप सोनी का कहना है कि आलू में आई मंदी से कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। बाहर की मंडियों में उठाव होने से आलू की बिक्री नहीं हो पा रही है। आलू बेचने लगातार शीतगृह में जा रहे हैं लेकिन कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। 


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