लक्ष्मी जी आज भी महारास देखने के लिये तपस्या कर रही हैं

  • लक्ष्मी जी आज भी महारास देखने के लिये तपस्या कर रही हैं
You Are HereDharmik Sthal
Saturday, September 14, 2013-8:52 AM

कुश स्थली (कोसी) : यह नन्दराय जी की कोष स्थली है। इसी स्थल को ब्रज की द्वारिका पुरी कहते हैं। यहां पर रत्‍नाकर सागर, माया कुण्ड तथा गोमती कुण्ड है।

बेलवन : श्री लक्ष्मी जी ने वृन्दावन में महारास देखने की अभिलाषा प्रकट की। लेकिन उन्हें महारास में प्रवेश नहीं दिया गया। वह आज भी इस स्थल पर वृन्दावन में महारास देखने के लिये तपस्या कर रही हैं। यहां पर पौष मास के प्रत्येक गुरुवार को मेला लगता है।

फ़ालेन: यह भक्त प्रह्‍लाद की जन्मस्थली है।

कामई : यह अष्ट सखियों में प्रमुख विशखा सखी जी का जन्मस्थान है।

खेलनवन : यहां गोचारण के समय श्री कृष्ण-बलराम सखाओं के साथ विभिन्न प्रकार के खेल खेलते थे। श्री राधा जी भी यहां अपनी सखियों के साथ खेलने आतीं थीं, इन्हीं सब कारणों से इस स्थान का नाम खेलनवन पड़ा।

बिहारवन : यहां पर श्री बिहारी जी के दर्शन और बिहार कुण्ड है। यहां पर रासबिहारी श्री कृष्ण ने राधिका जी सहित गोपियों के साथ रासविहार किया एवं अनेक लीला-विलास किए थे। श्री यमुना जी के पास यह एक सघन रमणीय वन है। यहां के गौशाला में आज भी कृष्णकालीन गौवंश के दर्शन होते हैं।

कोकिलावन : एक बार श्री कृष्ण ने कोयल के स्वर में कूह-कूह की ध्वनि से सारे वन को गुंजायमान कर दिया। कूह-कूह की धुन को श्री राधा जी ने पहचान लिया कि ये श्री कॄष्ण जी आवाज निकाल रहे हैं। ध्वनि को सुनकर श्री राधा जी विशाखा सखी के साथ यहां आईं, इधर अन्य सखियां भी प्राण-प्रियतम को खोजते हुए पहुंच गयीं। यह श्रीराधा-कृष्ण के मिलन की भूमि कृष्ण जी द्वारा कोयल की आवाज निकालने के कारण कोकिला वन कहलाई। यहां शनि देव जी का मन्दिर है।

खादिरवन : यह ब्रज के 12 वनों में से एक है। यहां श्री कृष्ण-बलराम सखाओं के साथ तर-तरह की लीलाएं करते थे। यहां पर खजूर के बहुत वृक्ष थे। यहां पर श्री कृष्ण गोचारण के समय सभी सखाओं के साथ पके हुए खजूर खाते थे। श्री कृष्ण जी ने यहां वकासुर नामक असुर का वध किया था।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You