उस पुत्र को प्रतिदिन गंगा स्नान का फल मिलता है

  • उस पुत्र को प्रतिदिन गंगा स्नान का फल मिलता है
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Friday, October 25, 2013-8:59 AM

वेद व्यास जी ने धर्म के पांच आख्यान बताएं हैं। पंच महायज्ञ हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्त्वपूर्ण बताये गए हैं। उन में से किसी एक का भी अनुष्ठान करके मनुष्य सुयश, स्वर्ग तथा मोक्ष पा सकता है। माता पिता की पूजा, पति की सेवा, सबके प्रति समान भाव, मित्रों से द्रोह न करना और भगवान श्री विष्णु जी का भजन। ये पांच महायज्ञ हैं।

इन पांच महायज्ञों में सबसे उत्तम व सर्वप्रथम आती है माता-पिता की पूजा। माता पिता की पूजा करके मनुष्य जिस धर्म का साधन करता है, वह इस पृथ्वी पर सैकड़ों यज्ञों तथा र्तीर्थ यात्रा आदि के द्वारा भी दुर्लभ है। पिता धर्म व स्वर्ग है और पिता ही उत्तम तपस्या है। पिता के खुश होने पर सभी देवता खुश हो जाते हैं। जिसकी सेवा और सदगुणों से माता पिता संतुष्ट रहते हैं, उस पुत्र को प्रतिदिन गंगा स्नान का फल मिलता है।

माता सर्वतीर्थमयी है और पिता संपूर्ण देवताओं का स्वरूप इसलिए समस्त प्रकार से माता पिता का पूजन करें। जो माता पिता की प्रदक्षिणा करता है उसके द्वारा सातों द्विपों से युक्त पृथ्वी की परिक्रमा हो जाती है। माता पिता को प्रणाम करते समय जिसके हाथ,मस्तक और घुटने पृथ्वी पर टिकतें हैं। वे अक्षय स्वर्ग को प्राप्त होता है। जब तक माता-पिता के चरणों की रज पुत्र के मस्तक और शरीर में लगती रहती है तभी तक वह शुद्ध रहता है। जो पुत्र माता-पिता के चरणों का जल पिता है। उसके करोड़ो जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। वह मनुष्य संसार में धन्य है।

जो नीच पुरूष माता-पिता की आज्ञा का उल्लघंन करता है, वह महाप्रलय तक पर्यन्त नरक में निवास करता है। जो रोगी, वृद्ध, जीविका से रहित अंधे और बहरे माता-पिता को त्याग कर चला जाता है। वह रौरव नरक में पड़ता है। इतना ही नहीं उसे चण्डाल की योनि में जन्म लेना पड़ता है। माता पिता का पालन पोषण न करने से समस्त पुण्यों का क्षय हो जाता है।  माता-पिता की आराधना न करके पुत्र यदि तीर्थ और देवताओं की भी सेवा करेे तो उसे उसका फल नहीं मिलता।


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