श्री हनुमान जी बल, बुद्धी, विद्या की खान हैं, जिससे माया की ग्रन्थी खुल जाती है

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Tuesday, November 26, 2013-1:37 PM
 श्री हनुमान जी जब लंका पहुंचे तो अपनी विज्ञान विद्या से लघु रूप लेकर प्रवेश करने के लिए चले गए। लंका द्वार पर पहरा लगा रही लंकिनी राक्षसी ने देखा और बोली," तुम कौन हो जो मेरा निरादर करके अंदर जा रहे हो।"

श्री हनुमान जी उसकी बात को अनसुना करके तेज - तेज चलने लगे। राक्षसी फिर जोर से चिल्लाई," यहां पर आने वाला प्रत्येक चोर मेरा आहार होता है। सुनो! सुनो! तुम मेरे भोजन हो।"

श्री हनुमान जी ने तुरंत अपनी विज्ञान विद्या का प्रयोग किया और विशाल रूप धारण कर लिया। लंकिनी ऊपर - ऊपर देखने लगी जहां तक उसकी निगाह जा सकती थी। इससे पहले कि वो कुछ समझ पाती श्री हनुमान जी ने उसे एर जोर का घूंसा मारा। प्रहार से वह भूमि पर गिर गई, मुख से खून बहने लगा। वह हनुमान जी की शरण में चली गई। यहां विद्या का प्रयोग किया गया है।

श्री हनुमान जी बल, बुद्धी, विद्या की खान हैं, जिससे माया की ग्रन्थी खुल जाती है।


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