अगर परमात्मा हम सब के अंदर है तो हमें नजर क्यों नहीं आता

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Thursday, November 28, 2013-8:18 AM
 

 

ऋषियों मुनियों ने हमारे शरीर को नर नारायणी कहकर संबोधित किया है। यह वह देह है जो नारायण ने खुद पैदा की है और स्वयं उसमें बैठे हुऐ है और जिसके अंदर नारायण खुद बैठे हो, उसके अंदर ही नारायण या परमात्मा से मिलने का मन प्राप्त हो सकेगा।

हजरत ईसा कहते हैं," यह वह मंदिर है जिसके अंदर आप को साक्षात परमात्मा मिलेगा।"

अगर परमात्मा हम सब के अंदर है तो हमें नजर क्यों नहीं आता ? हम आंखे बंद करते हैं तो हमें अपने अंदर अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है। मालिक और मनुष्य के अंदर किस चीज की रूकावट है और उसे किस तरह दूर कर सकते हैं।

गुरू साहिब कहते हैं," परमात्मा जरूर हम सब के अंदर है लेकिन हमारे और मालिक के अंदर हौंमैं की रूकावट है, खुदी की रूकावट है, अपने आप की रूकावट है। इस हौंमैं के कारण ही हम दुनिया के जीव दिन रात दुखों और मुसिबतों में फंसे हुए हैं।"

हौंमैं क्या है

हम सारा दिन सोचते हैं यह मेरी कौम है, मेरा मजहब, मेरा मुल्क, मेरी जायदाद, मेरी औलाद यही हौंमैं है। जब तक जीव अपने रास्ते से हौंमैं की रूकावट दूर नहीं करेगा वह अपने अंदर परमात्मा को नहीं पा सकेगा।

हौंमैं की रूकावट रास्ते में से किस तरह दूर होगी

गुरू नानक देव जी कहते हैं," जब तुम्हारा ख्याल अंदर उस शब्द धुन या वाणी रूपी अमृत से जुड़ जाएगा तो उसकी लज्जत हासिल करके तुम्हारे अंदर दुनियां का मोह निकल जाएगा, दुनिया का प्यार निकल जाएगा। तुम्हारे रास्ते से हौंमैं की रूकावट दूर हो जाएगी और तुम वापिस जाकर सदा के लिए परमात्मा से मिल जाओगे।"


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