कृष्णावतार

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Tuesday, January 14, 2014-8:58 AM

पक्षी चहचहाने लगे। दूसरा बाण छूटा तो बागीचे की शोभा और भी बढ़ गई। सुंदर अप्सराएं नृत्य करने  और गंधर्व गाने लगीं। तरह-तरह के वाद्य बजने लगे। पांचवें बाण से मदन ने शिव शंभु के शरीर में काम का संचार किया। उनकी समाधि टूटी। रुद्र रूप हो उठे वह। भगवान शंकर का तीसरा नेत्र खुला और उससे जो ज्वाला निकली उससे कामदेव भस्म हो गया।

पति के भस्म हो जाने पर रति (कामदेव की पत्नी) रोती, विलाप करती आई और देवाधिदेव भगवान शंकर के चरणों में गिर पड़ी। भगवान रुद्र का क्रोध शांत हुआ और रति का विलाप सुनकर भोलेनाथ ने उसे वरदान दिया, ‘‘आज से तेरा पति पुरुषों के शरीर में काम रूप में व्याप्त रहेगा और तू स्त्रियों के शरीर में रति रूप में रहेगी। त्रेतायुग के अंत में तेरा पति विष्णु अवतार श्री कृष्ण का पुत्र प्रद्युम्र होगा तब तू दानव राज शम्भर के भवन में जाकर रहना वहीं अपने पति से तेरी भेंट होगी।’’

जब दानव राज शम्भर का प्रद्युम्न जी ने वध कर डाला तो मायावती ने सारा रहस्य उन पर प्रकट कर दिया और दोनों पति-पत्नी बनकर हंसी-खुशी द्वारिका लौट आए।

                                                                                                                                                                               (क्रमश:)


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