ऐसे पाएं धन के लिए लक्ष्मी जी की कृपा

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Friday, January 17, 2014-7:44 AM

शुक्रवार मां लक्ष्मी का प्रिय दिन माना गया है। इस दिन धन, ऐश्वर्य, भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए मां की पूजा और उपाय दोहरा लाभ दिलाते हैं। देवी लक्ष्मी जी को धन-सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। सुख, समृद्घि और शांति की मंगल कामना के लिए वैभव की देवी माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। मां लक्ष्मी जिस पर भी अपनी कृपा दृष्टि डालतीं हैं वह दरिद्र, दुर्बल, कृपण, के रूपों से मुक्त हो जाता है। आप भी मां लक्ष्मी की कृपा पा सकते हैं। मां को प्रसन्न करना बहुत आसान है, आपकी भावना सच्ची होनी चाहिए।

लक्ष्मी जी की पूजा घर-घर होती है लेकिन मां हर घर में विराजमान नहीं होतीं, इसका कारण यह भी है कि कई हम अज्ञानतावश उन्हें नाराज कर देते हैं, उनकी पूजा अर्चना  विधि-विधान से नहीं करते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि इनकी पूजा में कोई गलती न करें। जिस कक्ष में पूजा स्थल बनाएं, वहां ताजा हवा व रोशनी का पर्याप्त प्रबंध होना चाहिए। पूजन कक्ष में चमडे़ का सामान, जूते-चप्पल आदि न ले जाएं। प्रतिदिन सच्चे ह्रदय से लक्ष्मी पूजा करने से कोई भी इन्हें अपने पास स्थायी रूप से रख सकता है। जिस घर में प्रतिदिन श्रीसूक्त का पाठ होता है, वहां लक्ष्मी अवश्य निवास करती हैं।

धन के लिए आप तमाम उपाय आजमाने पर भी यदि कोई फायदा ना हो रहा हो तो अपने घर के नलों व टूटियों की जांच कर लें। किसी भी नल से पानी बहना या टपकना नहीं चाहिए। इससे लक्ष्मी जी रूठ जाती हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपके घर पर मां लक्ष्मी की दया हमेशा बनी रहे, तो तुरंत अपने घर के सभी नल ठीक करवा लें।

महाभारत में लिखित है कि आलस और परिश्रम न करने वाले से महालक्ष्मी रूष्ट हो जाती हैं। इसलिए आलस का त्याग करें और मेहनत से काम करें, लक्ष्मी मैय्या आप पर हमेशा प्रसन्न रहेंगी तथा धन की वृद्धि होगी।

जहां भी स्वच्छता एवं सुव्यवस्था के गुण होंगे, वहां दरिद्रता का कोई स्थान नहीं होता, लेकिन यदि आसपास का वातावरण साफ सुथरा नहीं हो तो लक्ष्मी मां अपने पीछे दरिद्रता छोड़ व्यक्ति के जीवन से सदैव के लिए विदा ले लेती हैं। इसलिए लक्ष्मी जी की असीम कृपा पाने के लिए साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। घर से अवांछित सामान, पुराने कपड़े, जूते, डिब्बे आदि तुरंत हटा दें। ये सामान नकारात्मक ऊर्जा के स्त्रोत होते हैं।

जिस घर में स्नेह, वात्सल्य, आत्मीयता और शांति का वास होता है वहीं लक्ष्मी जी का वास होता है। इसलिए अपने परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम पूर्वक संबंध बना कर रखें और उन्हें पूरा सम्मान दें। अगर आप लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो सबसे पहले घर की महिलाओं का आदर-मान करना सीखें।

जहां शंखध्वनि नहीं होती, तुलसी का निवास नहीं रहता, शंकरजी की पूजा नहीं होती, वहां लक्ष्मी नहीं रहतीं। जिस स्थान पर शंखध्वनि होती है, तुलसी का निवास रहता है व इनकी सेवा, वंदना होती है, वहां लक्ष्मी सदा विद्यमान रहती हैं। पूजन के दौरान शंख व घंटनाद न सिर्फ देवों को प्रिय है, इससे वातावरण भी शुद्घ होता है। यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुका है कि शंख की ध्वनि से बैक्टीरिया नष्ट होते हैं।

जो व्यक्ति भगवान विष्णु की उपासना नहीं करता तथा एकादशी और जन्माष्टमी के दिन अन्न खाता है, उसके घर से भी लक्ष्मी चली जाती हैं। जहां भगवान श्री हरि के गुणों का कीर्तन होता है, वहीं पर सम्पूर्ण मंगलों को भी मंगल प्रदान करने वाली भगवती लक्ष्मी निवास करती है।

दीपावली के दिन पीपल का एक अखंडित पत्ता प्रार्थना करके वृक्ष से तोड़ लाएं और इसे पूजाघर में रख दें। फिर प्रत्येक शनिवार को नया पत्ता तोड़कर पूजाघर में रखें और पुराने पत्ते को पेड़ के नीचे रख आएं। इससे घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होगा और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।


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