कृष्णावतार

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Tuesday, January 21, 2014-8:27 AM

मायावती आयु में प्रद्युम्र जी से 10 वर्ष बड़ी थीं। अनेक यादवों को प्रद्युम्र जी का यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा। प्रद्युम्र जी के माता रुक्मणी जी को भी अपने पुत्र का यह आचरण बिल्कुल न भाया।

उन्होंने मायावती से तो क्या प्रद्युम्र जी से भी भेंट करने से स्पष्ट इंकार कर दिया। जब कभी प्रद्युम्र जी उनके सामने आ जाते और प्रणाम करते तो वह आशीर्वाद दिए बिना ही मुंह फेर कर चल देती थीं। प्रद्युम्र जी ने भरसक प्रयास किए परन्तु मायावती के विषय में रुक्मणी जी का व्यवहार न बदला।

परन्तु इस मामले में कृष्ण जी रुक्मणी जी से सहमत नहीं थे। वह कहा करते थे कि, ‘‘प्रद्युम्र हमारा पुत्र है। वह सबसे स्नेह करता है। वह कामदेव की तरह सुंदर है और हंसमुख भी है।’’

कुछ यादव प्रमुखों ने मायावती को घने वन में देखा था। वे उसे यादव कुल में सम्मिलित करने के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि वन में उन्होंने एक माया देखी। हम आपस में कानाफूसी कर रहे थे कि वह अदृश्य हो गई। जब हम वन में उसके मार्ग पर गए तो मार्ग में जगह-जगह आग भड़कती देखी जैसे वह ज्वाला बनकर दौड़ती चली जा रही हो।
 
                                                                                                                                                                        (क्रमश:)


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