लाल रंग की रेखा संवार सकती है आपका जीवन

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Thursday, January 30, 2014-7:45 AM

शहरी जीवन और तड़क-भड़क की जिन्दगी में हम नियमों को ताक में रखकर मनमाने ढंग से घर या मकान का निर्माण कर लेते हैं। जब भारी लागत लगाने के बावजूद भी घर के सदस्यों का सुख चैन गायब हो जाता है, तब हमें यह आभास होता है कि मकान बनाते समय कहां पर चूक हुई है। जाने अनजाने में अपना मकान बनाते समय भूल या परिस्थितिवश कुछ वास्तुदोष रह जाते हैं।  

कुछ घरों में शौचालय अथवा स्नान घर गलत दिशा अथवा स्थान पर निर्मित होते हैं जिस वजह से वहां पर रहने वाले पारिवारिक सदस्यों को अक्सर दुख, दर्द, परेशानी,कलह कलेश अथवा बीमारियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे हालात उत्पन्न हो तो शौचालय अथवा स्नान घर को दिशा अथवा स्थान पर निर्मित करवाया जाना चाहिए।

पुरातन शास्त्रों के मतानुसार शौचालय अथवा स्नान घर केवल पूर्व मध्य दिशा में होना चाहिए। सुविधा को मध्य नजर रखते हुए स्नानघर को शौचालय से जो़डकर बनाया जाता है। जहां तक संभव हो ऐसी स्थिति में पानी की ढलान पूर्व व उत्तर दिशा की ओर रखी जानी चाहिए। सीवरेज लाइन की सुविधा उपलब्ध हो तो पानी या शौचालय के लिए वर्जित स्थानों में गढ्ढा नहीं करना चाहिए।

शौचालय व स्नानघर के अवशिष्ट पानी के निकास के लिए कई बार मकान में गढ्ढा बना देने से अवांछित दोष उत्पन्न हो जाते हैं। यह गढ्ढा अगर 5-6 फुट से अधिक हो तो नुकसान दे सकता है। यदि पानी के मकान से बाहर निकास की उचित व्यवस्था हो जाए व इस तरह के अवशिष्ट को भूखंड में प्रवेश से रोक दिया जाए तो दोष को कम किया जा सकता है।

अगर टॉयलेट घर के पूर्वी कोने में है तो यह एक दोष है। निवारण यह है कि टॉयलेट सीट इस प्रकार लगाएं कि उस पर उत्तर की ओर मुख करके बैठ सकें या पश्चिम की ओर। अगर ऐसा करने में असमर्थ हो तो शौचालय अथवा स्नान घर के बाहर एक लाल रंग की रेखा खींच दें। यह रेखा ऑइल पेंट से खींची जा सकती है। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और नकारात्मकता का नाश होगा। जहां वास्तु दोष ने आपका सुख चैन छीन लिया था वहीं एक लाल रेखा से आपका जीवन संवर सकता है।


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