जानें किस घर में आती हैं धन की देवी महालक्ष्मी

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Friday, March 14, 2014-7:59 AM

मातरः सर्व भूतानां गावः सर्वसुखप्रदाः
गौएं समस्त प्राणियों को माता के सदृश्य सब विधि सुखों को देने वाली हैं।

हिन्दू धर्म में गाय को माता के समान सम्मानजनक स्थान प्राप्त है। अमृत तुल्य दूध्, दही, घी, गोमूत्रा, गोमय तथा गोरोचना के समान अमूल्य वस्तुएं प्रदान करने वाली गाय को शास्त्रों में सर्व सुख प्रदान करने वाली कहा गया है। सनातन धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों, धार्मिक संस्कारों एवं शुभ अवसरों पर सर्व प्रथम गाय माता के गोबर से जगह को पवित्र किया जाता है।

 मान्यता है जिस जगह को प्रतिदिन गाय के गोबर से लीपा पोता जाता है वह जगह हमेशा पवित्र रहती है और उस स्थान में मां लक्ष्मी सर्वदा निवास करती हैं। ऐसे घर को धन-दौलत से समृद्ध करती हैं मां लक्ष्मी। समस्त देवी देवताओं ने गाय के शरीर में अपनी अपनी जगह बनाई तो मां लक्ष्मी जी गाय माता से आज्ञा मांगती हैं कि, मैं आपके शरीर में सर्वदा निवास करना चाहती हूं। 33 करोड़ देवी देवता आप में निवास करते हैं। कृपया मुझे भी यह सौभाग्य प्रदान करें और बताएं मैं आपके शरीर के किस भाग में प्रवेश करूं?

गाय माता ने कहा," आप मेरे गोबर में निवास करें।"

मां लक्ष्मी जी ने गाय माता की यह बात स्वीकार कर ली और गोबर में वास करने लगी। तत्पश्चात गाय के गोबर को पवित्र और लक्ष्मी स्वरुप माना जाने लगा।


गाय का ज्योतिषीय महत्वः-

1. नवग्रहों की शांति के लिए गौदान करें।

2. शनि की दशा, अंतरदशा और साढ़सती से निजात पाने के लिए काली गाय का दान करें।

3. मंगल के अशुभ प्रभाव को नष्ट करने के लिए लाल रंग की गाय की सेवा करें अन्यथा गरीब ब्रह्मण को गौदान करें।

4. बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव को नष्ट करने के लिए गाय को हरा चारा खिलाएं।

5. गाय माता की सेवा और पूजा करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं।

6.गाय की सेवा मानसिक शांति प्रदान करती है।

 ईश्वरः स गवां मध्ये
गौ के मध्य में ईश्वर की उपस्थिति होती है।


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