श्री ज्वालामुखी मंदिर: भव सागर से पार करती हैं मां कात्यायनी

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Saturday, April 05, 2014-2:56 PM

विश्व विख्यात शक्ति पीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र ज्योति के दर्शन लाइनों में किए और जैकारे भी लगाए। आज छठा नवरात्र है इस दिन माता कात्यानी कि विशेष पूजा की जाती है। देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए मां दुर्गा महर्षि कात्यायन के आश्रम पर प्रकट हुई और महा ऋषि ने उन्हें अपनी कन्या माना तभी से कात्यायनी के नाम से माता की प्रसिद्धि हुई।

मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यन्त दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है। यह अपनी प्रिय सवारी सिंह पर विराजमान रहती हैं। इनकी चार भुजाएं भक्तों को वरदान देती हैं, इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है, तो दूसरा हाथ वरद मुद्रा में है अन्य हाथों में तलवार तथा कमल का फूल है।

इनका गुण शोध कार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं। ये वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गईं। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी। यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी। इसीलिए ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है।

इस संदर्भ में पुजारी रूडर शर्मा ने कहा कि छठे नवरात्रे को कात्यायनी माता की विशेष पूजा होती है। कात्यायनी माता सुख समृद्धि प्रदान करने वाली होती है । उन्हें हलवा पूरी का भोग लगाया जाता है और जो इस दिन माता कात्यायनी की पूजा करता है वो भव सागर से पार हो जाता है।

इस संदर्भ में मंदिर अधिकारी देवी राम ने कहा कि आजकल चैत्र नवरात्रे चल रहे हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा ज्वाला जी के चरणों में लगभग 20 लाख रुपए,17 ग्राम 400 मिली ग्राम सोना एवं लगभग 1 किलो ग्राम चांदी अर्पित किया गया है।

 नवरात्रों के शुभ अवसर पर छठे ,सातवें व् अष्टमी के दिन24 घंटे ज्वाला माता का दरवार श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहेगा। ताकि श्रद्धालु को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।


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