दक्षिण एशिया को चाहिए मलाला जैसे और मुखर स्वर: फातिमा

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Thursday, November 07, 2013-9:55 AM

नई दिल्ली: पाकिस्तानी लेखिका और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की भतीजी फातिमा भुट्टो ने कहा है कि न केवल पाकिस्तान, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप को मलाला यूसुफजाई जैसी निडर और बुलंद आवाज की दरकार है। यूसुफजाई  साहसिक तरीके से तालिबान के खिलाफ आवाज उठा कर उनका कोपभाजन बनी। फातिमा को भी निडर और स्पष्टवादिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि ‘निडर और साफ सोच वाली’ आवाजें पिछड़े इलाकों से उठनी चाहिए न कि शहरों में रहने वाले उच्च वर्गीय लोगों के बीच से आनी चाहिए।

 

फातिमा अपने उपन्यास ‘आधे चांद की छाया’ के प्रकाशन समारोह को समर्थन देने के लिए यहां आई हैं। आईएएनएस को दिए गए एक साक्षात्कार में पाकिस्तान की राजनीति में दबदबा रखने वाले परिवार की फातिमा (31) ने कहा कि उनकी स्पष्टवादिता से उन्हें असामाजिक तत्वों से कोई खतरा पैदा नहीं हुआ है, लेकिन उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पाकिस्तानियों को और ज्यादा ‘मुखर’ स्वर की जरूरत है।

 

फातिमा ने कहा, ‘‘मैं समझती हूं कि मलाला के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि वह हमारे देश में दिखने वाली अन्य महिलाओं के मुकाबले नई आवाज है। शहरों से उठने वाली आवाजें कुछ निश्चित पृष्ठभूमि और अंग्रेजीदां तबके से आती हैं। इसका कारण यह है कि वे अंतर्राष्ट्रीय स्कूलों में गई होती हैं।’’ फातिमा ने कहा, ‘‘मलाला की आवाज स्वतंत्र, स्पष्ट सोच वाली है और इसीलिए मैं सोचती हूं कि हम ऐसी ही आवाज भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से उठती देखना चाहेंगे।’’

 

तालिबान के खिलाफ बोलने और लड़कियों की शिक्षा के पक्ष में दलील देने के कारण मलाला (16) को तालिबान ने गर्दन और सिर में गोली मार दी थी। महिलाओं की शिक्षा और आधिकारितकता की वकालत करने के लिए उसे कई सम्मान मिले और वह इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित भी हुई थी।


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