थाईलैंड में ताजा हिंसा के बीच फिर विरोध प्रदर्शन का दौर

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Thursday, December 26, 2013-7:21 PM

बैंकाक: थाईलैंड की पुलिस ने आज यहां एक खेल स्टेडियम में प्रवेश का प्रयास और पथराव कर रही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया, जिसमें 15 सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी एवं तीन पुलिस अधिकारी घायल हो गए। इस स्टेडियम में राजनीतिक दल आम चुनाव के लिए पंजीकरण करवा रहे थे।

एक माह से चल रहे प्रदर्शन अभियान के दौरान यह दूसरा ऐसा मौका है जब पुलिस को आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। पिछले कई वर्ष में यह सबसे बुरा राजनीतिक हिंसा का दौर है। नेशन आनलाइन ने बताया कि आंसू गैस एवं गोली चलाने में 15 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए। तीन पुलिस अधिकारियों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। छात्रों एवं पीपुल नेटवर्क फार थाईलैंड्स रिफार्म के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों द्वारा स्टेडियम प्रवेश द्वार पर लगायी गयी अड़चन को तोडऩे के बाद सुबह सात बजकर 20 मिनट पर कई राउंड गोलियां चलाई गईं।

विपक्षी डेमोके्रटिक पार्टी कह चुकी है कि वह दो फरवरी को होने वाले चुनाव का बहिष्कार करेगी। झड़प उस समय शुरू हुई, जब 27 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि चुनाव के लिए पार्टी सूची की संख्या के ड्रा के लिए स्टेडियम पहुंचे।
पुलिस ने सभी निकासी द्वार बंद कर दिये तथा प्रदर्शनकारियों को प्रवेश से रोकने के लिए सभी द्वार पर पुलिस वाहन लगा दिये गए।

इस बीच, सेंटर फार एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ पीस एंड आर्डर (सीएपीओ) ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा आंसू गैस के प्रयोग का बचाव किया। सीएपीओ का नेतृत्व करने वाले उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सुरापांग तोवीचकचाईकुल ने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से निपटने में संयम बरता। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को अपना विरोध प्रदर्शित करने का अधिकार है।

बहराहाल, सरकार एवं पुलिस उनके गैर कानूनी कार्य को हमेशा सहन नहीं करते रह सकते क्योंकि देश में कानून है और हर किसी को उसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्थिति से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निपटा गया। बहरहाल, नेशन आनलाइन ने खबर दी है कि पुलिस ने आंसू गैस का प्रयोग करने से पहले प्रदर्शनकारियों को मात्र एक बार चेतावनी दी थी। कई प्रदर्शनकारियों के पास गुलेल थी और उन्होंने विरोध स्वरूप पुलिस पर पत्थर चलाए।

सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी मध्य अक्तूबर से ही मांग करते आ रहे हैं कि प्रधानमंत्री यिंगलक शिनवात्रा पद त्याग दें। प्रदर्शन उस समय शुरू हुए जब यिंगलक की सरकार ने एक विवादास्पद छूट विधेयक पेश किया। इससे पूर्व प्रधानमंत्री थाकशिन शिनवात्रा के लौटने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। 2006 में हुए तख्तापलट में सत्ता से हटने में बाद वह फिलहाल स्व निर्वासन पर दुबई में हैं।


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