'प्रेग्नेंट' टूरिस्ट महिलाओं से परेशान है ब्रिटेन

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Tuesday, December 31, 2013-12:55 PM

लंदन: इन दिनों ब्रिटेन दूसरे देशों से आ रही गर्भवती महिलाओं से परेशान है। ये महिलाएं चाहती हैं कि उनका बच्चा ब्रिटेन में पैदा हो। जिसका कारण ब्रिटेन में होने वाली नैशनल हेल्थ स्कीम (एनएचएस) के तहत महिलाओं की मुफ्त डिलिवरी है और प्रैगनेंसी के बाद का खर्च भी काफी कम है।

लेकिन ब्रिटेन में इस 'मैटरनिटी टूरिज़म' के कारण समस्या इतनी बढ़ गई कि हाल में लगभग 300 प्रेग्नेंट महिलाओं को एक एयरपोर्ट पर ही रोक देना पड़ा। यह महिलाएं ज्यादातर यूरोपीय यूनियन के देशों जैसे रोमानिया, बल्गारिया और पश्चिमी अफ्रीका से थीं। इन महिलाओं को रोकने की सोशल साइट्स और अखबारों में खासी चर्चा हुई।

आमतौर पर कोई भी एयरलाइन 36 हफ्तों या उससे अधिक की गर्भवती महिला को यात्रा की इजाजत नहीं देती। लेकिन एयरपोर्ट पर रोकी गई सारी महिलाएं जांच में 36 हफ्ते से अधिक की गर्भवती थीं, उन्होंने ब्रिटेन की उड़ान भरने के लिए डॉक्टर से फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। ब्रिटेन का स्वास्थ्य विभाग ऐसे माइग्रेशन या टूरिज़म से काफी परेशान है।

विभाग के प्रवक्ता ने बताया, "हमारी स्वास्थ्य योजना राष्ट्रीय स्तर की है, न की अंतरराष्ट्रीय स्तर की। अगर ऐसे ही केस आते रहे तो हमारा सारा सिस्टम खराब हो जाएगा। ब्रिटेन की नैशनल हेल्थ स्कीम के तहत शॉर्ट टर्म माइग्रेंट्स और टूरिस्टों के लिए 2 करोड़ पाउंड (करीब 20 करोड़ रुपये) सालाना खर्च किए जाते हैं।"

स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, ब्रिटेन में स्वास्थ्य योजनाएं इतनी आधुनिक हैं कि आम लोगों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होती। जहां तक बच्चे को जन्म देने की बात है तो इस देश में औसतन एक रात का खर्च 1092 पाउंड यानी करीब 10,920 रुपये है। इतने कम खर्च में ऐसी आधुनिक सुविधा अन्य किसी भी देश में मिलना नामुमकिन है।

यूरोपीय यूनियन और अन्य अफ्रीकी देशों की महिलाएं अपने देश में बच्चे को जन्म नहीं देना चाहतीं। इन महिलाओं का कहना है कि अपने देश में बच्चे को जन्म देना वहां की तुलना में महंगा पड़ेगा। यूरोपीय यूनियन के देशों को लेकर ब्रिटेन के प्रवासी कानून बेहद उदार हैं, लेकिन इन दिनों कानूनों को बदलने की कवायद जोर पकड़ चुकी है।

अखबारों में दी जानकारी के अनुसार, अगले साल 1 जनवरी से इन कानून में बदलाव होगा। देश की लगभग आधी से अधिक जनता इन कानूनों को बदलने के पक्ष में है। लोगों का कहना है कि यूरोपियन यूनियन के देशों की जनता बेहतर नौकरी और स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते इस विकसित देश का रुख करती हैं, लेकिन इससे यहां की जनता के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाती है।



 

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