देवयानी ने कहा, परेशान करने वाला है भरारा का यह सुनियोजित कदम

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Wednesday, January 08, 2014-2:59 PM

न्यूयॉर्क: वरिष्ठ भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े ने अपने खिलाफ वीजा धोखाधड़ी मामले को सुलझाने के लिए अर्जी पर जारी चर्चा का सार्वजनिक तौर पर खुलासा करने के लिए अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा की निंदा की है और कहा है कि यह ‘‘परेशान करने वाला सुनियोजित कदम’’ है जिससे स्थिति और बिगड़ेगी।

देवयानी ने कहा कि दोनों पक्ष अर्जी पर चर्चाओं को सार्वजनिक नहीं करने पर सहमत हुए थे। देवायानी के वकील डेनियल अरशक ने भरारा को एक मजबूत जवाब दिया है जिसने मजिस्ट्रेट जज सारा नेटवर्न को पत्र लिखकर कहा था कि उन्होंने उचित मापदंडों का उल्लेख किया है, जो मुद्दे का समाधान कर सकते हैं।

देवयानी ने अपने खिलाफ मामले में अभियोग दायर करने की समय सीमा 13 जनवरी तय होने के मद्देनजर उसे यह कहते हुए एक महीने बढ़ाने का अनुरोध किया था कि तिथि का ‘‘आसन्न दबाव’’ पक्षों के बीच की अर्थपूर्ण चर्चा की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। यद्यपि देवयानी की अर्जी का अभियोजन ने विरोध किया है।

भरारा ने कहा कि उनका कार्यालय राजनयिक के साथ अभियोग दायर करने से पहले की चर्चाएं गत कई सप्ताह से जारी रखे हुए हैं। भरारा ने कहा कि उनके कार्यालय ने ‘‘दायर किए जाने वाले अभियोग तय होने की उम्मीद में उस पर घंटों चर्चा की’’ ताकि उसे 13 जनवरी से पहले अदालत में दायर किया जा सके।

अरशक ने इस बात पर नाखुशी जताई कि भरारा ने नेटबर्न को भेजे एक पत्र में मामले में अभियोग दायर होने से पहले उस पर जारी चर्चाओं की जानकारी दे दी। अरशक ने कहा, ‘‘हमें हैरानी हैं और हम दुखी हैं कि अभियोजन ने उन चर्चाओं का और उन्हें जारी रखने के तरीके को सार्वजनिक करने को चुना। वास्तव में अभी तक की सहमति यही थी कि चर्चाओं के बारे में कोई भी विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह भी सोच सकते हैं कि उस सहमति का उल्लंघन सोच विचार कर परेशान करने के लिए किया गया है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हम विवरण सार्वजनिक किए जाने से पूरी तरह से असहमत हैं और हम आशा करते हैं कि अभियोजन एक-तरफा कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगा, जिससे स्थिति का और ध्रवीकरण हो।’’

उन्होंने कहा कि इस मामले में और ध्रुवीकरण से बचने के लिए ही हम संघीय अदालत से यह इच्छा व्यक्त कर रहे हैं कि वह उस समयसीमा को बढ़ा दे, जिसमें अभियोजन या तो अभियोग दायर करे या एक प्रारंभिक सुनवाई के लिए तैयार रहे। उनकी मुवक्किल स्वयं ही समयसीमा को बढ़ाने के लिए कह रही हैं, क्योंकि समयसीमा इस मामले के ‘‘जल्द, त्वरित और न्यायिक तथा किफायती हल’’ की संभावना में ‘‘हस्तक्षेप’’ कर रही है।

अरशक ने कहा, ‘‘अभियोजन ने बार- बार यह कहा है कि 13 जनवरी 2014 की समयसीमा ही उसे अभियोग दायर करने को आगे बढऩे को मजबूर कर रही है। हमने यह अर्जी समयसीमा बढ़ाने के लिए दी है, क्योंकि हम चाहते हैं कि स्थिति पर जारी दबाव समाप्त कर दिया जाए और वे प्रयास होने दिए जाएं, जिससे दोनों पक्षों के बीच का यह मामला सुलझ सके और आगे बढ़ा जा सके।’’

उन्होंने कहा कि अभियोग दायर होने से मामले पर दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता सहित भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक स्तर पर जारी प्रयास खतरे में पड़ सकते हैं। अरशक ने कहा, ‘‘बचाव पक्ष और न्याय विभाग सहित सभी हितधारकों के ईमानदार प्रयास तभी परवान चढ़ सकेंगे, जबकि 13 जनवरी 2014 से पहले अभियोग दायर किए बिना अथवा प्रारंभिक सुनवाई के बिना इस मामले को सुलझाया जा सके।’’

भरारा ने कहा था कि वह अभियोग दायर करने के लिए समयसीमा को आगे बढ़ाने की मांग नहीं कर रहे हैं और उसका कहना है कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए चर्चा अभियोग दायर होने के बाद भी जारी रह सकती है।

अरशक ने अभियोजन के इस सुझाव को ‘‘उल्लेखनीय तौर पर गलत’’ करार दिया कि ‘‘अदालत के पास यह फैसला करने का कोई प्रस्ताव नहीं है’’ क्योंकि उसने ऐसी मांग नहीं की है। अरशक ने कहा, ‘‘उन्होंने प्रकट कर दिया है कि वे ऐसी राहत के लिए नहीं कह रहे हैं। जबकि यह सही है, यह भी सच है कि उन्होंने वास्तव में अभियोजन के जवाब में कहीं पर भी हमारे अनुरोध का विरोध नहीं है... और वे ऐसा क्यों करेंगे उन्हें भी और समय मिलने का लाभ प्राप्त होगा। इसलिए हम मांग करते हैं कि हमारे अनुरोध (समयसीमा बढ़ाने संबंधी) को मंजूर किया जाए।’’

उन्होंने कहा कि अभियोजन किसी भी समय अभियोग दायर करने के लिए मुक्त है और समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध उसे ऐसा करने से ‘‘रोकेगा’’ नहीं। हम अभियोजन की उस बात को मानकर चल रहे हैं कि वह विशेष रूप से 13 जनवरी 2013 की समयसीमा के चलते अभियोग दायर करने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। समयसीमा बढ़ाने की अनुमति का नियम इसलिए है ताकि मामले को कम समय में सुलझाया जा सके। अभियोजन को मन-मानी तिथि को अभियोग दायर करने के लिए बाधित करने में कोई लाभ नहीं होगा, जबकि प्रतिवादी स्वयं ही उसे हटाने की मांग कर रही है।’’

गौरतलब है कि भारत देवयानी खोबरागड़े के खिलाफ मामले को वापस लेने और 39 वर्षीय देवयानी की गत 12 दिसम्बर को गिरफ्तारी के बाद उनके कपड़े उतारकर तलाशी लेने और उन्हें अपराधियों के साथ बंद रखने के लिए अमेरिका से माफी की मांग कर रहा है। भारतीय मूल के अभियोजक भरारा के कार्यालय को देवयानी की गिरफ्तारी के 30 दिन के भीतर अभियोग दायर करना है।

अमेरिका ने गत माह कहा था कि वह देवयानी के खिलाफ मामले में आगे बढ़ रहा है और उसका मामले को वापस लेने का कोई इरादा नहीं है। गिरफ्तारी के समय देवयानी न्यूयार्क में उप महावाणिज्य दूत थीं, जिसके बाद उन्हें संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में स्थानांतरित कर दिया गया था। 1999 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी देवयानी को अपनी नौकरानी संगीता रिचर्ड के आवेदन में झूठी घोषणा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें ढाई लाख डॉलर के बांड पर रिहा किया गया था। भारत ने गत माह इस मामले में जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी राजनयिकों को दी जाने वाली कुछ विशेष सुविधाएं वापस ले ली थीं।


 


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