खुद को ‘उपेक्षित’ महसूस करते हैं अंतरराष्ट्रीय छात्र

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Tuesday, February 11, 2014-6:52 PM

लंदन: ब्रिटेन में पढऩे वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में अधिकांश वहां खुद को अपेक्षित महसूस करते हैं और भारत, पाकिस्तान और नाइजीरिया के छात्र अपने मित्रों को शायद यह सलाह भी देते हैं कि इस देश में पढऩे न आएं। नेशनल यूनियन आफ स्टूडेंट्स के 3100 अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रूझान पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक मानते हैं कि ब्रिटिश सरकार विदेशी छात्रों का ‘स्वागत नहीं’ करती।

द इंडिपेंडेंट में सर्वेक्षण के कल जारी आंकड़े बताते हैं कि पीएचडी के छात्र (65.8 प्रतिशत) सबसे अधिक अपेक्षित महसूस करते हैं। उनमें से भारत (62 प्रतिशत), जापान (64.5 प्रतिशत), नाइजीरिया (62.8 प्रतिशत) महसूस करते हैं कि उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं होता। रिपोर्ट के अनुसार भारत, पाकिस्तान और नाइजीरिया के छात्र अपने मित्रों को यहां अध्ययन नहीं करने की सलाह देते हैं।

यह पूछे जाने पर कि सबसे अधिक परेशान करने वाली बात क्या है, 40 प्रतिशत ने कहा कि उनके मकान मालिक उनकी वैद्य हैसियत की जांच करते हैं जबकि 74 प्रतिशत का कहना है राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा कर लागू होने से ब्रिटेन में उनके लिये अध्ययन करना असंभव अथवा अधिक कठिन है। दैनिक के अनुसार छात्र नेताओं का कहना है कि ये आंकडे ‘‘काफी चिंताजनक’’ हैं क्योंकि अनुमान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय छात्र ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में हर साल 7.9 अरब पाउंड का योगदान देते हैं। आंकडे पिछले साल भर्ती में गिरावट दर्शाते हैं जो 23900 से घटकर 19700 हो गयी है हालांकि यूनिवसर्सिटीज एण्ड कालेज एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस :यूसएसी : के आकड़े दर्शाते हैं कि इस साल उसमें फिर इजाफा हो रहा है।


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