यूक्रेन संकट: रूस पर अमेरिका का रुख हुआ नर्म

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Wednesday, March 05, 2014-1:17 PM

कीव: यूक्रेन के संकट के हल के लिए यूक्रेन तथा रूस ने मंत्री स्तर पर अपना परामर्श शुरू कर दिया है और उधर अमेरिका ने जहां अपने रूख में थोड़ी नरमी दिखाई है, वहीं पश्चिमीं देशों तथा यूरोपीय संघ ने रूस के जवाब में सैनिक हस्तक्षेप से इंकार किया है।

यूक्रेन तथा रूस के बीच मंत्री स्तर पर परामर्श की बात यूक्रेन के प्रधानमंत्री ने पहली बार स्वीकार की है। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यूक्रेन में रूस के हित की बात तो स्वीकार की है, किन्तु उन्होंने इस देश में सैनिक हस्तक्षेप के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के दावे को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है। अमेरिका सोची सम्मेलन में भाग नहीं लेने के अपने निश्चय पर कायम है।

अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने जो यूक्रेन में सत्ता पलट के बाद कीव के दौरे पर हैं, आरोप लगाया है कि रूस यूक्रेन पर हमले का बहाना ढूंढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेकिा यूक्रेन के मामले में टकराव नहीं चाहता। वह इस मसले को अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से हल करने के पक्ष में है।

यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि मॉस्को ने यूक्रेन में अतिरिक्त सेना भेजी है और रूसी नौसेना ने रूस तथा यूक्रेन जल डमर को अवरद्ध कर दिया है। रूसी सेनाओं ने चेतावनी देने के लिए हवा में गोलियां चलाई हैं। रूसी नौसेना के जहाजों ने यूक्रेन को रूस से अलग करने वाले काला सागर को अवरद्ध कर रखा है।

गौरतलब है कि यूक्रेन की क्रीमिया पहले पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा था और 1954 में निकिता खुस्चेव ने उसे यूक्रेन को सौंपा था। पश्चिमीं देशों ने यूक्रेन के संकट पर रूस के प्रति नरमीं दिखाई है और इस देश में फिलहाल बड़े सैनिक टकराव का खतरा टल गया है, लेकिन संकट के हल का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। रूस ने भी सैनिक हस्तक्षेप से इन्कार किया है, किन्तु वह इस देश में अपने हितों और रूसी मूल के लोगों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार बैठा है।

 


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