'हद से बाहर न जाए रूस, अन्यथा भुगतने पड़ेंगे गंभीर परिणाम'

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Tuesday, March 11, 2014-5:07 PM

संयुक्त राष्ट्र: यूक्रेन मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों की एक बार फिर बंद कमरे में बैठक हुई। यूक्रेन के आग्रह करने पर कल इस अनौपचारिक बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि देश उपस्थित थे।

ब्रिटिश राजदूत मार्क लिऑल ग्रांट ने कहा कि बैठक का उद्देश्य यूक्रेन को उसके यहां हो रहे घटनाक्रम पर अपनी चिंताएं व्यक्त करने के लिए एक अवसर देना था। यह चिंताएं यूक्रेन विकास और विशेषकर रविवार को होने वाले जनमत संग्रह के बारे में थीं। दस दिनों के अंदर इस पैनल की यह पांचवी बैठक थी।

क्रीमिया को लेकर रूसी समर्थक संसद ने एक जनमत संग्रह की बात कही है, जिसमें यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि क्या क्रीमियावासी यूक्रेन से अलग हो रूस के साथ आना चाहते हैं। कीव और पश्चिमी देश इस जनमत संग्रह को गैर-कानूनी मान रहे हैं।

फ्रांसीसी राजदूत गेरार्ड आरॉड ने कहा कि सुरक्षा परिषद को चाहिए कि वह रूसियों को अवश्य ही यह संदेश दे कि वह अपनी सीमा में रहें, नहीं तो इसके बाद उन्हें बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

उन्होंने कहा, रूस के लिए यही संदेश है, कोई जनमत संग्रह नहीं, आपको यूक्रेन के संविधान और बातचीत का सम्मान करना होगा। सुरक्षा परिषद अब तक इस संकट पर एक आम दृष्टिकोण बनाने में असफल रहा है।

गौरतलब है कि मॉस्को सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है और वह परिषद के किसी भी निर्णय को अपने वीटो के अधिकार से रद्द करने में भी सक्षम है।


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