टेक्नॉलोजी और फास्ट फूड ने ऐसी दी दर्दनाक सजा

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Monday, April 07, 2014-5:33 PM

नई दिल्ली: आधुनिक युग में लोग बदलते हुए लाइफस्टाइल से काफी खुश हैं और वह इस लाइफस्टाइल में पूरी तरह से खो गए है। लोगों को लगता है कि हम टेक्नॉलोजी के एक ऐसे युग में पैदा हुए हैं जहां सब कुछ महज एक क्लिक पर हासिल किया जा सकता है। इसी गलतफहमी की शिकार इस महिला के साथ ऐसा हादसा हो गया जिससे उसे आत्महत्या करनी पड़ी। इस महिला को भाग-दौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते हुए टेक्नॉलोजी के इस्तेमाल ने इतना तनाव में डाल दिया कि उसे इस तरह का फैसला लेा पड़ा।

पेशे से एक आर्ट टीचर इस महिला को पर्यावारण से काफी प्यार था। शारीरिक और मानसिक रूप से फीट इस महिला को आम जीवन जिना पसंद था। महिला को दुनिया में लोगों का टेक्नॉलोजी की तरफ बढ़ता इस्तेमाल पसंद नहीं था। महिला का मानना था कि मार्डन गैजेट्स के बगैर भी आज की दुनिया पचास साल पहले की दुनिया जैसे भी जी सकती थी। लेकिन आज के दौर के लोग टेक्नॉलोजी से जुड़े रहते हैं। न सिर्फ इतना बल्कि उनके खान-पान में भी फास्ट फूड की मात्रा बढ़ गई है। उसे लोगों का ई-मेल करना और फोन पर घंटों बातें करते रहना भी पसंद नहीं था। उसने सोचा ऐसी दुनिया में जीने का कोई मतलब नहीं। यह सोच महिला ने आत्महत्या करने की सोची।

जान लेने के लिए उसने स्विटजरलैंड के मशहूर डिजिटनास क्लिनिट को चुना जहां उसने इच्छा मृत्यु दी जाती है। वो वहां गई और अपनी वजह बताकर खुद को मार डाला। मरने से पहले उसने कहा कि टेक्नॉलोजी की ऐसी तेज रफ्तार जिंदगी में कहीं शांति नहीं है और इसलिए वो ऐसी दुनिया से विदा लेना चाहती है। महिला का नाम सुसेक्स था और वो 89 साल की थी।


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