महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने वाले कानून के खिलाफ पाक के पुरुष

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Sunday, November 13, 2016-4:26 PM

इस्लामाबादः पाकिस्तान में पुरुषों के साथ घर में बुरे बर्ताव को रोकने और उनके अधिकारों को लेकर अगले हफ्ते से एक बड़ी डिबेट शुरू होगी। एक धार्मिक संस्था इस बाबत कानून बनाने की मांग को लेकर ये डिबेट करेगी। हालांकि कहा जा रहा है कि ये कोशिश महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने वाले एक कानून को कमजोर करने के लिए की जा रही है। बता दें कि पंजाब प्रोविंस में फरवरी में महिलाओं के डोमेस्टिक वॉयलैंस के खिलाफ बिल पास हुआ था, जिसे नैशनल एसैंबली की मंजूरी मिलनी अभी बाकी है।

 पाकिस्तानी अखबार, ‘द डॉन’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कंजर्वेटिव काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (CII) सोमवार से इस मुद्दे पर बहस शुरू करेगी। सी.आई.आई. मैंबर साहिबजादा जाहिद एम कासमी ने संस्था के चेयरमैन मौलाना मोहम्मद शिरानी को लैटर लिखकर पुरुषों को घर में होने वाले बुरे बर्ताव से बचाने के लिए कानून बनाए जाने की वकालत की थी।  इसी के बाद संस्था ने इस पर बहस शुरू करने का फैसला किया है। कासमी पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल भी हैं। 

 डॉन के मुताबिक, कासमी ने अपने लैटर में कहा है- 'देश में कुछ महिलाएं पुरुषों को टॉर्चर करती हैं और उन्हें घर से निकल जाने के लिए मजबूर करती हैं।'  इस्लाम में पुरुषों को अपने अधिकारों की सुरक्षा करने का हक दिया गया है।  कासमी ने काउंसिल ने रिक्वेस्ट की है कि इस मसले पर चर्चा की जाए और पुरुषों के एक प्रोटेक्शन बिल के लिए सिफारिशें की जाएं।

 कासमी ने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए ऐसा ही एक बिल इस साल फरवरी में पंजाब प्रोविंस में पास किया गया था। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, कासमी ने कहा कि पंजाब में बिल पास होने के बाद कुछ पुरुषों ने मुझसे कॉन्टैक्ट किया था। 'पुरुषों ने कहा कि जब इस्लाम की इजाजत और पाकिस्तान के कानून के मुताबिक महिलाओं को उनका हक दिया गया है तो हमें भी हमारे बाकी हक मिलने चाहिए।'
 


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