'शरिया कोर्ट' को लेकर ब्रिटेन में बढ़ा विवाद

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Saturday, November 05, 2016-2:00 PM

लंदनः ब्रिटेन में 'शरिया कोर्ट' को लेकर बढ़ा विवाद बढ़ता जा रहा है। ब्रिटेन में शरिया पंचाट की जांच कर रही दो समितियों के ख़िलाफ़ सौ से ज़्यादा महिलाओं ने शिकायत की है। पहली जांच समिति का गठन टेरीज़ा मे ने उस समय किया, जब वे गृह मंत्री थीं।  दूसरी का गठन संसद के गृह मंत्रालय की प्रवर समिति ने की थी। टेरीज़ा मे फ़िलहाल ब्रिटेन की प्रधानमंत्री है।

कुछ महिलाओं ने एक खुले पत्र पर दस्तख़त किए हैं। इस चिट्ठी में कहा गया है कि जांच का मक़सद पंचाट में सुधार करना नहीं, इस पर प्रतिबंध लगाना है। द मुस्लिम वीमन्स नेटवर्क यूके के मुताबिक़, इसकी आशंका है कि जांच समिति महिलाओं का इस्तेमाल "राजनीतिक फ़ुटबॉल" की तरह करें। मुस्लिम वीमन्स नेटवर्क यूके की अध्यक्ष शाइस्ता गोहिर का मानना है कि जांच समितियां महिलाओं के हितों की रक्षा कर सकती हैं। उन्होंने कहा, "मुस्लिम महिलाओं के भयावह अनुभवों को सुनना तो हर कोई चाहता है, पर जब उसके समाधान की बात आती है, हर कोई समझता है कि उस मामले को सबसे बेहतर वही समझता है।"

शाइस्ता  का मानना है कि कुछ लोग शरिया परिषदों को ख़त्म कर देना चाहते है्ं। उन्होंने कहा, "मुझे ऐसा लगता है कि कुछ लोग धर्म विरोधी, ख़ास कर इस्लाम विरोधी हैं. वे महिलाओं के बहाने शरिया परिषद को ख़त्म कर देन चाहते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "यदि कल या अगले साल शरिया परिषद बंद कर दिए जाएं तो मुस्लिम महिलाएं ऐसी शादियों से बाहर नहीं निकल पाएंगी, जिनमें उनके साथ दुर्व्यवहार होता है।ऐसे में शरिया से होने वाले तलाक़ गुपचुप तरीके से होने लगेंगे।"

गोहिर के मुताबिक़, इससे पारदर्शिता कम हो जाएगी, तलाक़ ख़र्चीला हो जाएगा और भेद भाव बढ़ जाएगा।शरिया परिषद वह पंचाट है, जहां अमूमन मुस्लिम समुदाय के विवादों का निपटारा किया जाता है।वे हर मामले का निपटारा इस्लामी क़ानूनों से ही करना चाहते हैं। वित्तीय लेनदेन से लेकर शादी-ब्याह से जुड़े मामलों तक में शरिया के नियम ही लागू करने की कशिश की जाती है।लेकिन, इन पंचाटों पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है और आम लोग इसके बारे में मोटे तौर पर नहीं जानते हैं।


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