श्रीलंका के इस कदम से फेल हुए चीन के मनसूबे

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Wednesday, July 26, 2017-11:35 AM

कोलंबो: श्रीलंका के जरिए भारत को घेरने की कोशिश करने वाले चीन को करारा झटका लगा है। दरअसल श्रीलंका ने मंगलवार को चीन की ओर से हंबनटोटा बंदरगाह को विकसित करने के करार में बदलाव कर दिया जिससे श्रीलंकाई कैबिनेट के इस फैसले से चीन के मनसूबे फेल हो गए।


जनता के विरोध के चलते उठाया एेसा कदम 
श्रीलंकाई कैबिनेट को देश की जनता के विरोध के चलते एेसा कदम उठाना पड़ा। हाल ही में श्रीलंका के स्थानीय लोगों ने अपनी सरकार पर हंबनटोटा बंदरगाह को चीन के हाथों बेचने का आरोप लगाकर विरोध प्रदर्शन किया था। बौद्ध भिक्षु भी चीन के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। बता दें कि हंबनटोटा पर नियंत्रण के पीछे चीन की मंशा अपने सिल्क रूट को सफल बनाने के साथ ही भारत को समुद्री मार्ग से घेरना है। इंडस्ट्रियल जोन विकसित करने के नाम पर चीन यहां 15000 एकड़ जमीन अधिगृहित करने की योजना में है।


भारत के साथ ही जापान और अमरीका की चिंता हुई दूर
चीन ने भारत को घेरने के लिए श्रीलंका के दक्षिण में स्थित हंबनटोटा बंदरगाह को विकसित करने और वहां चीनी निवेश बनाने का करार किया था।बता दें कि चीन इस बंदरगाह को सैन्य गतिविधियों के लिए भी उपयोग कर सकता था। हालांकि श्रीलंका सरकार ने भी चीन की सरकारी कंपनी चाइना मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग को 80 फीसदी हिस्सेदारी देने की बात कही थी लेकिन स्थानीय जनता के विरोध को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने बंदरगाह को संचालन पर चीन की भूमिका को सीमित कर दिया है। साथ ही अब चीन इस बंदरगाह को सैन्य मकसद के लिए उपयोग नहीं कर सकेगा। श्रीलंका के इस कदम से भारत के साथ ही जापान और अमरीका की चिंता दूर होगी।
 

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