'ठग बाबाओं' के शिकंजे में फंसता हमारा समाज

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Sunday, September 15, 2013-7:59 AM

जालंधरः हमारे देशवासियों के दिल में धर्म के प्रति एक अलग संवेदनशीलता और गहन श्रद्धा विराजमान है। लेकिन जो मौजूदा हालात है उससे यहा कहा जा सकता है कि हमारा देश और हमारा समाज घोर संकट के दौर से गुजर रहा है।

अगर आप यह सोच रहे हैं कि यहा संकट से हमारा अभिप्राय देश की अर्थव्यवस्था या देश में बढ़ रहे अपराधों या फिर देश में हो रहे भ्रष्टाचार की कर रहे है तो आप गलत है। यहां हम बात कर रहे हैं धर्म की आड़ में देश के आम आदमी को अपने चंगुल में ले चुके उन आस्था के ठेकेदारों की जिनके पास आकर एक सामान्य आदमी यह तक नहीं सोच पाता कि उसके लिए अच्छा क्या है और बुरा क्या।

भारतीय समाज आस्था के भयावह विचलनों के भंवर में फंस गया है। महज कुछ अपवादों को छोड़ दें तो इन ठेकेदारों के नाम बेशक अलग-अलग हैं लेकिन इनके काम एक ही है। समाज ने इनको ऐसी पवित्र उपाधियां दी हुई है जो शायद उन उपाधियों का अपमान होगा। संत, साधू या बाबा और या फिर बापू ऐसे पवित्र स्थानों पर विराजमान आस्था के इस दलालों के नकाब हटाकर अगर असली चेहरे के बारे में सोचा भर भी जाए तो शायद आप चक्कर खा जाएं।

अगर आप गौर करें तो आप पायेंगे कि पिछले कुछ समय से इनकी संख्या में अच्छी खासी वृद्धि हो चुकी है। शायद इसकी एक बजह यह भी है कि इन्होंने मीडिया के सामने भी खुद को भगवान बताना शुरू कर दिया है। अपने विज्ञापनों से लोगों को आकर्षित करना और आस्था की आड़ में अपने वाक् कौशल लोगों पर अपनी ऐसी छाप छोड़ना कि एक सामान्य आदमी अपना सब कुछ इन्हें ही मान लेता है।       

चाहे बात अपने एजेंटों द्वारा इनके बीच अपने चमत्कारों की कहानियां प्रचारित करवाने की हो या फिर अपने भक्तों की वोट के लालच में नेताओं को अपने पीछे घुमाने की या फिर काले धन को किस तरह सफेद करना है हर तरह की महारत इनके पास होती है।

लेकिन सोचने वाली बात यह भी है कि ऐसे क्या कारण है जिनकी बजह से देश का आम नागरिक तेजी से इन आस्था के सौदागरों के हत्थे चढ़ रहा है। दिमाग में सिर्फ एक ही जबाव सटाक से निकलता है वो ये कि देश की कमजोर प्रशासन प्रणाली, भ्रष्टाचार, महंगाई, आपराधों ने इस कदर जकड़ लिया है कि हर एक देशवासी अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहा है चाहे वह किसी भी मोर्चे पर खड़ा है। हर किसी का विश्वास मौजूदा राज्यतंत्र और हमारे समाज के रखवाले बने इन राजनेताओं से पूरी तरह से विखंडित हो चुका है।

हालात यह है कि खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे आम इंसान को जहां भी खुद को सुरक्षित महसूस करता है उसी तरफ खुद को अग्रसर कर लेता है। और इसी ताक में होते हैं ये बनाबटी बाबा जो भक्ति, विश्वास और लोगों के कल्याण के नाम पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। इसलिए हम कह सकते हैं कि देश जो हालात कुछ समय से पैदा हो चुके है उन्होंने आम आदमी को इतना बेबस कर दिया है कि वो इन पाखंडियों के शिकंजे की और खींचता चला जाता है।

हमारा निशाना यहां नकली धर्म-व्यापारियों पर है जो लोगों की मानसिकता पर इस कदर हावी हो चुके है कि अब लोग चाहते हुए भी उनके शिकंजे से निकलने को तैयार नहीं है। अगर हमें इन नकली दलालों से हमारे समाज को मुक्त करवाना है तो हमें साहस भरकर इनके बनाए हुए चक्रब्यूह को तोड़ना होगा और इन सब के खिलाफ सड़कों पर उतरना होगा नहीं तो यूं ही हमारी आस्था को दोहन जारी रहेगा और हमारे समाज की स्थिति बद से बदत्तर होती चली जाएगी, जरूरत है तो बस एक शुरूआत की।

Edited by:Vikas kumar

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