गांधी का पोता भी आया लेकिन भाषा आंदोलनकारी रहे खाली हाथ

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Thursday, October 24, 2013-11:30 AM

नई दिल्ली: न्यायालयों की कार्यवाही एवं सभी शीर्ष प्रशासनिक परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में कराने की मांग को लेकर यहां जंतर मंतर पर पिछले छह माह से धरना दे रहे भारतीय भाषा आंदोलनकारियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।  इस साल 21 अप्रैल से जंतर मंतर पर धरना दे रहे इन आंदोलनकारियों के साथ यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते कनु गांधी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री, बहुजन समाज पार्टी के नेता तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री यशवंत निकोसे तथा गांधी ग्रामोद्योग के पूर्व निदेशक बी एस चौहान जैसे कई लोगों ने धरना दिया और प्रदर्शन किया लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी।

आंदोलन के संयोजक पुष्पेंद्र चौहान तथा महासचिव देव सिंह रावत ने बताया कि इस दौरान उन्होंने एक बार राष्ट्रपति को तथा दो बार प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया है लेकिन उसका उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आंदोलनकारियों ने ङ्क्षहदी दिवस का भी विरोध किया और कई प्रमुख साहित्यकार इसमें शामिल हुए। जुलूस निकालकर विरोध नियमित ही किया जा रहा है लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि इस दौरान उनके धरना स्थल पर लगे टेंट को भी पुलिस उठाकर ले गई और उनके साथियों का सामान भी ले गई। उन्होंने कहा कि उन्हें चाहे जो भी प्रताडऩा सहनी पड़े। वे आंदोलन को जारी रखेंगे। रावत ने कहा कि आंदोलनकारियों ने 14 साल तक यहां लोकसेवा आयोग के समक्ष दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा धरना दिया है। उन्होंने कहा कि अब वे तब ही उठेंगे जब उनकी बात मान ली जाएगी।
 

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