जलाशय अतिक्रमण पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को दिए निर्देश

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Tuesday, November 05, 2013-2:19 PM

नई दिल्ली : राजधानी में स्थित जलाशयों को अवैध कब्जे व अवैध निर्माण से बचाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से कहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि कोई भी निजी व्यक्ति इन पर अपना अधिकार न जमा पाए। न्यायालय ने कहा  है कि जलाशय राजधानी के वातावरण को सुधारने में सहायता करते हैं, ऐसे में यह अधिकारियों की ड्यूटी बनती है कि वह इनकी सुरक्षा करें।

मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रामना व न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने यह आदेश रेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन की तरफ से दायर एक जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के रेवेन्यू विभाग को  निर्देश दिया है कि अगर उन्होंने किसी निजी व्यक्ति को यह जलाश दिए हैं तो उन सभी से जलाशयों को अपने कब्जे में ले लें। इसके लिए इन व्यक्तियों को इनके बदले में कोई जमीन दे दें।

इस मामले में दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि सरकार को निर्देश दिया जाए कि सभी जलाशयों को अवैध कब्जे व अवैध निर्माण से सुरक्षा की जाए।अदालत ने कहा कि उनका मानना है कि जलाशय, जोहड़, झील व पानी के टैंक आदि न सिर्फ कम्युनिटी की संपत्ति हैं, बल्कि वातावरण को सुधारने में भी मददगार हैं।

वहीं भारतीय संविधान के अनु(छेद 48ए में कहा गया है कि  वातावरण की सुरक्षा करना व अ(छा बनाना हर रज(य का कत्र्तव्य है। ऐसे में सभी उपायुक्त को निर्देश दिया जाता है कि वह यह सुनिश्चित करें कि कोई भी जलाशय, जोहड़, पानी के टैंक व झील पर अवैध कब्जा न कर पाए। अगर पूर्व में किसी ग्रामीण को किसी जलाशय की जमीन अलॉट कर दी गई है और उस पर कोई पक्का निर्माण नहीं हुआ है तो उस जलाशय की जमीन को वापस ले लिया जाए।

इसके बदले उस व्यक्ति को कोई और जमीन दे दी जाए। इतना ही नहीं सभी उपायुक्त की जिम्मेदारी है कि वह सभी जलाशयों की साफ-सफाईव उनको विकसित करने पर ध्यान दें।

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