अपने किले को अभेद्य बनाने में जुटी कांग्रेस

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Tuesday, November 12, 2013-3:34 PM

नई दिल्ली ( ताहिर सिद्दीकी): भाजपा के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने से कांग्रेस पूर्वी दिल्ली को लेकर खासी सजग हो गई है। डॉ. हर्षवर्धन के आने से उनके गृह मैदान पूर्वी दिल्ली के मतदाता कांग्रेस से मुंह मोड़ सकते हैं इस नजरिए से कांग्रेस ने अपने किले को अभेद्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

इसके लिए चुनाव प्रचार के दौरान किस तरह की रणनीति अपनाई जाए इस पर कांग्रेस में मंथन शुरू हो गया है। गत 3 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने में पूर्वी दिल्ली का अहम रोल रहा है। ऐसे में कांग्रेस नए सिरे से व्यूह रचना बनाने में जुटी है।

दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को भाजपा ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तो बना दिया लेकिन उन्हें अपने गृह मैदान यानी पूर्वी दिल्ली में ही सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है कांग्रेस का गढ़  कहे जाने वाले पूर्वी दिल्ली के इलाके, जहां भाजपा को जीत  दिलाना टेढ़ी खीर है लेकिन कांग्रेस आशंकित  है कि हर्षवर्धन के आने से इसका असर पूर्वी दिल्ली की सीटों पर पड़ सकता है और इसके मद्देनजर अपनी तैयारियां तेज कर दी है।

अगर पूर्वी दिल्ली की 16 विधानसभा सीटों या 64 निगम सीटों की बात करें तो भाजपा के पास सिर्फ  5 विधानसभा सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 11 सीटें हैं। हालांकि निगम में भाजपा की स्थिति थोड़ा बेहतर है, जहां उसके 64 सदस्यों वाले हाऊस में 35 सदस्य हैं। नए हालात में कांग्रेसी भी अंदरूनी रूप से स्वीकार करते हैं कि अब पूर्वी दिल्ली में उन्हें काफी मेहनत की जरूरत पड़ेगी। 

यदि कांग्रेस की बात की जाए तो गांधीनगर से शहरी विकास मंत्री अरविंदर सिंह लवली, जिन्होंने पिछला चुनाव सबसे ज्यादा मतों के अंतर से लगभग 36,925 मतों से जीता था। लक्ष्मीनगर की सीट स्वास्थ्य मंत्री डॉ.अशोक कुमार वालिया की है जो अब तक की सभी विधानसभा चुनाव जीतकर आए हैं और उनके और दूसरे नंबर के प्रत्याशी के मतों का अंतर लगभग 24 फीसद का था। जबकि मुख्यमंत्री के पूर्व संसदीय सचिव नसीब सिंह विश्वासनगर से 3 बार चुनकर आए हैं और उन्होंने भाजपा के ओ.पी. शर्मा को लगभग 10 हजार मतों के अंतर से हराया था।

शाहदरा से यमुनापार विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्रनाथ जो पूर्व मंत्री भी हैं और काफी मजबूत स्थिति में हैं। यह वे सीटें हैं जहां अल्पसंख्यक मतों का घनत्व बहुत ज्यादा नहीं है। सीमापुरी की सीट जहां अल्पसंख्यक वोट काफी हैं, वहां पर कांग्रेस के वीरसिंह धींगान को 49.13 फीसद मत मिले थे, जबकि भाजपा के चंद्रपाल सिंह को लगभग आधे  27. 56 फीसद मत मिले और यदि सीलमपुर की बात करें तो जल बोर्ड के उपाध्यक्ष मतीन अहमद अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के सीताराम गुप्ता से दोगुने से भी ज्यादा अंतर से चुनाव जीते थे और उनकी विधानसभा के लोगों से बात करें तो उनका कहना है कि मतीन अहमद को सभी लोगों का समर्थन हासिल है। यही हाल 6 अन्य सीटों का है। हर्षवर्धन को कांग्रेस के कई नामी-गिरामी राजनीतिक हस्तियों से पार पाना होगा।

बावजूद इसके कांग्रेस ने इन सीटों के लिए नए सिरे से व्यूह रचना शुरू कर दी है। कांग्रेस पूर्वी दिल्ली में बड़े पैमाने पर कराए गए विकास कार्य को भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पूर्वी दिल्ली में विकास कार्य, मैट्रो रेल के फैलाव से लेकर प्रस्तावित मोनो रेल को भुनाने का ब्लूपिं्रट तैयार हो रहा है। इसमें फ्लाइओवर निर्माण तथा दिल्ली हाट जैसी परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है।   


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