लिंगदोह सिफारिश के विरोध में विरोध-प्रदर्शन तेज

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Thursday, November 14, 2013-5:33 PM

नई दिल्ली : करीब डेढ़ साल पहले एक अंतरिम समझौते के तहत लिंगदोह सिफारिश मानने वाले जे.एन.यू. छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन तेज कर दिया है। छात्रों ने लिंगदोह  सिफारिशों पर फिर से विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पेटीशन दिया है। जे.एन.यू. छात्रसंघ का कहना है कि पेटिशन पर 2400 छात्रों ने सिग्नेचर के साथ सहमति दी है। छात्रों का कहना है कि लिंगदोह मॉडल छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकार नहीं देता।

जे.एन.यू. छात्रंसघ के अध्यक्ष अकबर चौधरी ने कहा कि लिंगदोह की सिफारिश को चुनावों में पैसे और पॉवर के दुरुपयोग को रोकने के लिए लाया गया लेकिन इसे रोकने में भी यह मॉडल नाकाम रहा है, इसलिए इसपर फिर से विचार किया जाए।

वहीं, डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन के उमर खालिद ने कहा कि जे.एन.यू. के अपने छात्रसंघ चुनाव के सिस्टम में कोई खामी नहीं थी। यहां के छात्रों ने लंबी लड़ाई के बाद हासिल किया था, इसलिए इसे फिर से लागू किया जाए। हालांकि पहले से सुप्रीम कोर्ट में जे.एन.यू. छात्रसंघ से जुड़े मामले में कांस्टीट्यूशनल बैंच के पास मामला लंबित है। छात्रों ने उस मामले में तेजी से सुनवाई की मांग की है।

लिंगदोह की सिफारिश के विरोध में जे.एन.यू. ज्वाइंट फ्रंट बनाने वाले उमर खालिद कहते हैं कि जे.एन.यू. छात्रसंघ को लिंगदोह की सिफारिश का जैसा विरोध करना चाहिए, वैसा नहीं किया जा रहा। ज्वाइंट फ्रंट की ओर से किए गए पहल के कारण आज छात्रसंघ को प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

अकबर चौधरी कहते हैं कि लिंगदोह की सिफारिशों को हटाने के लिए आगे भी प्रदर्शन किए जाएंगे। यह छात्रों के हक की बात है। हमें जे.एन.यू. का अपना चुनाव मॉडल फिर से चाहिए।


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