बच्चे की याचिका पर केंद्र को नोटिस

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Friday, November 22, 2013-6:47 PM

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक बच्चे की याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि एम्स में उसका इलाज करने से इसलिए मना कर दिया गया क्योंकि उसके माता-पिता महंगे इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। न्यायमूर्ति वी. के. जैन ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, दिल्ली सरकार और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को नोटिस जारी कर 11 दिसंबर तक जवाब मांगा है।

मोहम्मद अहमद (7) गोशर डीजिज टाइप-1 से पीड़ित है। उसके इलाज पर होने वाले 4.80 लाख रुपए प्रतिमाह का खर्च भुगतान कर पाने में असमर्थ रहने के कारण एम्स ने इलाज करने से मना कर दिया। बच्चे के माता-पिता बेहद गरीब हैं और यह खर्च जुटा पाना उसके वश में नहीं है। गौशर डीजिज वंशानुगत विकृति है जो शरीर के कई अंगों और उत्तकों को प्रभावित करती है।

बच्चे की ओर से पैरवी करने के लिए पेश अशोक अग्रवाल ने कहा कि चूंकि एम्स एक सरकारी अस्पताल है इसलिए इलाज का खर्च वहन कर पाने में असमर्थ रोगियों को मुफ्त चिकित्सा मुहैया कराना उसका संवैधानिक दायित्व है। वकील ने कहा कि बच्चे के पिता रिक्शा चलाते हैं और इसी बीमारी के कारण अपने चार बच्चों को खो चुके हैं। अहमद उनका आखिरी जीवित सन्तान है।


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